मीठा हुआ महंगा: चीनी के दाम 60 रुपये पार, अचानक आई तेजी से थोक मंडी से लेकर फुटकर बाजार तक चिंता
चीनी के दामों में अचानक तेजी आ गई है। कुछ दिन पहले तक 48-50 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब 60 रुपये किलो तक पहुंच गई है। थोक बाजार में भी चीनी 5,500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गई है, जो एक माह पहले 4,400 रुपये थी।
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बारिश में पकोड़ों के साथ चाय की चुस्कियां लेना महंगा पड़ने लगा है। चीनी के दाम में अचानक आई तेजी ने घरेलू और चाय के खोखे वालों का बजट गड़बड़ा दिया है। चंद रोज पहले तक 48 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाली चीनी के दाम अचानक 60 रुपये तक पहुंच गए हैं। थोक मंडी से लेकर फुटकर बाजार तक अचानक आई तेजी से व्यापारियों और उपभोक्ता की चिंता बढ़ा दी है।
इन दिनों चीनी मिलों से बाजार में आपूर्ति काफी घट गई है। मिलों में पुराना स्टॉक कम होने और आगामी पेराई सत्र से पहले नई आवक नहीं होने के कारण यह संकट खड़ा हुआ है। गन्ने के रस का उपयोग एथेनॉल निर्माण में किए जाने से भी इस बार चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ है। बीते एक महीने में चीनी की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिला है। एक माह पूर्व थोक बाजार में चीनी 4,400 रुपये प्रति क्विटंल बिक रही थी। कुछ दिन पहले दाम बढ़कर 4,700 रुपये प्रति क्विंटल हुए और अब 5,500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गए हैं।
त्योहारों से ठीक पहले लगा झटका
आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं। ऐसे में चीनी के दामों में आई यह तेजी आम परिवारों के साथ-साथ हलवाइयों और मिठाई कारोबारियों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।
पहले से ही आटा, दाल, तेल और सब्जियों की महंगाई ने जीना मुहाल कर रखा है, ऐसे में चीनी के दाम अचानक आसमान छूने से उनका पूरा मासिक घरेलू गणित गड़बड़ा गया है।
जिस चाय की चुस्की के साथ दिन की शुरुआत होती है, अब वही चीनी के महंगी होने के कारण फीकी लगने लगी है। खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ना आम लोगों के जीवन पर बड़ा असर डालता है।
- रिषिका अग्रवाल, गृहणी
त्योहारों पर बनने वाली मिठाइयां, खीर और पकवान महंगे दामों के कारण फीके पड़ जाएंगे या फिर जेब पर भारी पड़ेंगे। चीनी की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगना चाहिए।
- सुमन देवी, गृहणी
थोक मंडी में ही चीनी के दाम बढ़कर 55 से 60 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। ऐसे में परिवहन और अन्य खर्च जोड़कर फुटकर में चीनी 60 से 65 रुपये बेचने की मजबूरी है। आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो त्योहारों पर दाम अधिक बढ़ सकते हैं।
- मनीष मित्तल, चीनी व्यापारी
चीनी की कालाबाजारी को रोकने के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया है। चीनी मिलें किसी भी डीलर, एजेंट या खरीदार को चीनी बेचने के बाद उसे अपने परिसर में सात दिनों से अधिक समय तक जमा नहीं रख सकेंगी।
- त्रिलोक सिंह मर्ताेलिया, आयुक्त गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग