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Udham Singh Nagar News: 13 साल बाद प्रोबेट की मांग पर झटका, मालिकाना हक की याचिका खारिज
Mon, 27 Jul 2026 12:17 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 27 Jul 2026 12:17 AM IST
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रुद्रपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिकंद कुमार त्यागी की अदालत ने 13 वर्ष पुरानी अपंजीकृत वसीयत के आधार पर संपत्ति का मालिकाना हक मांगने वाली प्रोबेट याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड और महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर संपत्ति पर अधिकार नहीं पाया जा सकता। साथ ही याचिका परिसीमा अधिनियम के तहत समय-सीमा से बाहर पाई गई।
मामला आवास विकास कॉलोनी स्थित प्लॉट संख्या बी-61 से जुड़ा है। जसविंदर सिंह ने दावा किया था कि मूल आवंटी स्व. राम निहोरा सिंह ने 17 अक्तूबर 2005 को उनके पक्ष में वसीयत की थी। राम निहोरा सिंह का 20 मई 2010 को निधन हो गया था। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2023 में प्रोबेट याचिका दायर करते हुए कहा कि उत्तराखंड आवास एवं विकास परिषद ने प्रोबेट के अभाव में नामांतरण और बैनामा करने से इन्कार कर दिया।
सुनवाई में अदालत ने पाया कि वसीयतकर्ता की मृत्यु के करीब 13 वर्ष बाद याचिका दायर की गई और देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। यह भी सामने आया कि परिषद ने नामांतरण कब और किस आधार पर रोका, इससे जुड़े सरकारी अभिलेख अदालत में पेश नहीं किए गए।
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अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के समीर कपूर बनाम राज्य फैसले का हवाला देते हुए कहा कि प्रोबेट याचिकाओं पर भी परिसीमा अधिनियम, 1963 का अनुच्छेद-137 लागू होता है। इसी आधार पर याचिका को कालबाधित मानते हुए खारिज कर दिया गया।
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मामला आवास विकास कॉलोनी स्थित प्लॉट संख्या बी-61 से जुड़ा है। जसविंदर सिंह ने दावा किया था कि मूल आवंटी स्व. राम निहोरा सिंह ने 17 अक्तूबर 2005 को उनके पक्ष में वसीयत की थी। राम निहोरा सिंह का 20 मई 2010 को निधन हो गया था। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2023 में प्रोबेट याचिका दायर करते हुए कहा कि उत्तराखंड आवास एवं विकास परिषद ने प्रोबेट के अभाव में नामांतरण और बैनामा करने से इन्कार कर दिया।
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सुनवाई में अदालत ने पाया कि वसीयतकर्ता की मृत्यु के करीब 13 वर्ष बाद याचिका दायर की गई और देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। यह भी सामने आया कि परिषद ने नामांतरण कब और किस आधार पर रोका, इससे जुड़े सरकारी अभिलेख अदालत में पेश नहीं किए गए।
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अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के समीर कपूर बनाम राज्य फैसले का हवाला देते हुए कहा कि प्रोबेट याचिकाओं पर भी परिसीमा अधिनियम, 1963 का अनुच्छेद-137 लागू होता है। इसी आधार पर याचिका को कालबाधित मानते हुए खारिज कर दिया गया।