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किसानों को धान का 38 लाख रुपए का बकाया नहीं मिला
अमर उजाला ब्यूरो, ख्ाटीमा
Updated Sun, 29 Jan 2017 12:20 AM IST
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सहकारिता से जुड़े किसान नोट बंदी के बाद चल रही आर्थिक तंगी से उबर नहीं पा रहे हैं। जमीन के रकवे के आधार पर सहकारी समितियों में बनी लिमिट से खाद, बीज, कीटनाशक दवाईयां लेकर काम चलाने वाले लगभग एक लाख से अधिक किसान लेनदेन बंद होने से परेशान हैं। सहकारी धान क्रय केंद्रों में दिए गए धान का भुगतान भी अभी तक नहीं मिला है। जनपद में किसानों की लगभग 38 करोड़ की देनदारी बताई जा रही है।
खटीमा विकास खंड के अंतर्गत चलने वाली चार सहकारी समितियों से लगभग एक लाख किसान जुड़े हैं। समितियों की सदस्यता वाले ये किसान जमीन के आधार पर लेनदेन करते हैं। लिमिट के आधार पर लेनदेन करने वाले किसान फसल पर समितियों की देनदारी चुकता कर फिर नकदी सहित खाद, बीज, दवाईयां आदि कर्जा लेकर अपना काम चलाते हैं। लेकिन नोटबंदी के दौरान किसानों के नोट जमा नहीं होने से लगभग 75 प्रतिशत किसान कर्जा अदा नहीं कर पाए जिस कारण इनका लेनदेन बंद पड़ा है।
सहकारिता विभाग द्वारा खरीदे गए किसानों को धान का भुगतान भी अभी नहीं हुआ है। ऊधमसिंह नगर में किसानों का लगभग 38 करोड़ बकाया चल रहा है। यूसीएफ के जिला प्रबंधक बीर सिंह ने बताया कि भुगतान संबंधी कागजात शासन को भेजे जा चुके हैं।
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सीमांत क्षेत्र में चलने वाली लगभग पांच दर्जन राइस मिलों को लेवी के चावल का भुगतान नहीं मिल रहा है। राइस मिलर्स की मानें तो उनका सरकार की तरफ लगभग 75 करोड़ का बकाया है। जिसमें 45 करोड़ केंद्र और 30 करोड़ प्रदेश सरकार ने देना है। भुगतान लंबित रहने से किसानों को उनके धान का भुगतान नहीं दिया जा रहा है।
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खटीमा विकास खंड के अंतर्गत चलने वाली चार सहकारी समितियों से लगभग एक लाख किसान जुड़े हैं। समितियों की सदस्यता वाले ये किसान जमीन के आधार पर लेनदेन करते हैं। लिमिट के आधार पर लेनदेन करने वाले किसान फसल पर समितियों की देनदारी चुकता कर फिर नकदी सहित खाद, बीज, दवाईयां आदि कर्जा लेकर अपना काम चलाते हैं। लेकिन नोटबंदी के दौरान किसानों के नोट जमा नहीं होने से लगभग 75 प्रतिशत किसान कर्जा अदा नहीं कर पाए जिस कारण इनका लेनदेन बंद पड़ा है।
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सहकारिता विभाग द्वारा खरीदे गए किसानों को धान का भुगतान भी अभी नहीं हुआ है। ऊधमसिंह नगर में किसानों का लगभग 38 करोड़ बकाया चल रहा है। यूसीएफ के जिला प्रबंधक बीर सिंह ने बताया कि भुगतान संबंधी कागजात शासन को भेजे जा चुके हैं।
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सीमांत क्षेत्र में चलने वाली लगभग पांच दर्जन राइस मिलों को लेवी के चावल का भुगतान नहीं मिल रहा है। राइस मिलर्स की मानें तो उनका सरकार की तरफ लगभग 75 करोड़ का बकाया है। जिसमें 45 करोड़ केंद्र और 30 करोड़ प्रदेश सरकार ने देना है। भुगतान लंबित रहने से किसानों को उनके धान का भुगतान नहीं दिया जा रहा है।