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पर्वतीय किसानों के उत्पादों को बाजार मुहैया कराएगा पंत विवि
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पंतनगर विवि में एमओयू के दौरान कुलपति डॉ. तेजप्रताप व अन्य।
- फोटो : RUDRAPUR
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पहाड़ों में कृषि जोत छोटी और बिखरी होने के साथ ही उनके उत्पाद को उचित बाजार नहीं मिलने से किसानों की माली हालत अच्छी नहीं है, लेकिन अब जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय ने उनकी इस समस्या के निदान के लिए बंगलूरू मूल के कृषि स्टार्टअप ‘फार्मस’ के साथ अनुबंध किया है। विवि से विकसित उन्नत बीजों और अन्य कृषि निवेश के साथ उत्तराखंड के कृषकों, लघु उद्यमियों के कृषि संबंधी उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराएगी।
मंगलवार को विवि और बंगलूरू मूल के कृषि स्टार्टअप ‘फार्मस’ के साथ एमओयू (समझौता) पर हस्ताक्षर हुए। इसमें विवि से विकसित उन्नत बीज और अन्य कृषि निवेश के साथ उत्तराखड के कृषकों, लघु उद्यमियों के कृषि उत्पादों का विपणन किया जाएगा। इससे कृषकों की आजीविका में सुधार व आर्थिक प्रगति के साथ राज्य के कृषकों की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनेगी।
फार्मस ऑनलाइन प्लेटफार्म की मदद से सीधे उत्पादकों के विभिन्न उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं। इसका लाभ उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को मिलता है। फार्मस बंगलूरू सहित पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात व मध्य प्रदेश आदि राज्यों में कार्य करता है। स्टार्टअप के मुख्य परिचालन अधिकारी तरनवीर सिंह व आलोक दुग्गल ने समझौते के दौरान कहा कि कृषकों को इससे बड़ा फायदा होगा।
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कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने बताया कि शिक्षित युवाओं का कृषि आधारित स्टार्टअप ‘फार्मस’ कृषकों की आय वृद्धि में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एके शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड में ज्यादातर छोटे और सीमांत जोत के कृषक हैं। जिनके उत्पादों, ताजी सब्जियां, मशरूम, वर्मी कंपोस्ट, मसाले, मूल्यवर्धित आटा, बिस्किट, नमकीन, शहद, दाले, हैंडीक्राफ्ट उत्पाद आदि के विपणन की बड़ी समस्या है।
विवि के अधीन कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इन कृषकों, स्वयं सहायता समूहों एवं कृषक उत्पाद संगठन (एफपीओ) के उत्पादों के विपणन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा विवि के स्टार्टअप के साथ मिलकर काम करने से विकसित तकनीक का देश के अन्य भागों में भी प्रचार-प्रसार होगा। उन्होंने कहा कि विवि का स्टार्टअप ‘फार्मस’ के बीच यह अनुबंध कृषकों के आर्थिकी सुधार में मील का पत्थर साबित होगा।
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मंगलवार को विवि और बंगलूरू मूल के कृषि स्टार्टअप ‘फार्मस’ के साथ एमओयू (समझौता) पर हस्ताक्षर हुए। इसमें विवि से विकसित उन्नत बीज और अन्य कृषि निवेश के साथ उत्तराखड के कृषकों, लघु उद्यमियों के कृषि उत्पादों का विपणन किया जाएगा। इससे कृषकों की आजीविका में सुधार व आर्थिक प्रगति के साथ राज्य के कृषकों की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनेगी।
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फार्मस ऑनलाइन प्लेटफार्म की मदद से सीधे उत्पादकों के विभिन्न उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं। इसका लाभ उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को मिलता है। फार्मस बंगलूरू सहित पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात व मध्य प्रदेश आदि राज्यों में कार्य करता है। स्टार्टअप के मुख्य परिचालन अधिकारी तरनवीर सिंह व आलोक दुग्गल ने समझौते के दौरान कहा कि कृषकों को इससे बड़ा फायदा होगा।
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कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने बताया कि शिक्षित युवाओं का कृषि आधारित स्टार्टअप ‘फार्मस’ कृषकों की आय वृद्धि में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एके शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड में ज्यादातर छोटे और सीमांत जोत के कृषक हैं। जिनके उत्पादों, ताजी सब्जियां, मशरूम, वर्मी कंपोस्ट, मसाले, मूल्यवर्धित आटा, बिस्किट, नमकीन, शहद, दाले, हैंडीक्राफ्ट उत्पाद आदि के विपणन की बड़ी समस्या है।
विवि के अधीन कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इन कृषकों, स्वयं सहायता समूहों एवं कृषक उत्पाद संगठन (एफपीओ) के उत्पादों के विपणन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा विवि के स्टार्टअप के साथ मिलकर काम करने से विकसित तकनीक का देश के अन्य भागों में भी प्रचार-प्रसार होगा। उन्होंने कहा कि विवि का स्टार्टअप ‘फार्मस’ के बीच यह अनुबंध कृषकों के आर्थिकी सुधार में मील का पत्थर साबित होगा।