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डिजिटल प्रचार ने छीन लिया हुनरमंद पेंटरों का रोजगार, प्रिंटर्स भी हुए परेशान
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साबिर अनाउंसर
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। कोरोना महामारी और निर्वाचन आयोग के सख्ती से चुनाव प्रचार अब ऑनलाइन हो चला है। इसका असर पेंटरों और प्रिंटिंग प्रेस स्वामियों के धंधे पर पड़ा है। हुनरमंद पेंटर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर तैयार करने के कारोबारी भी परेशान हैं।
चुुनाव प्रचार पर निर्वाचन आयोग के कड़े पहरे के चलते राजनीतिक दल अपने संकल्प पत्र सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। ऑनलाइन प्रचार के दौर में प्रत्याशी और समर्थकों के बीच फेसबुक पर सत्ता संग्राम छिड़ा है। व्हाट्सएप ग्रुपों में भी लाइव प्रचार का जोर है। मोबाइल पर ही चुनावी मैसेज भेजे जा रहे हैं। इंस्टाग्राम और ट्वीटर पर भी प्रत्याशी हाजिर हैं। प्रचार के लिए वॉइस मैसेज का भी सहारा लिया जा रहा है। डिजिटल दौर में हुनरमंद पेंटरों की रोटी रोजी पर बन आई है।
पेशा बदलने की मजबूरी
25 सालों से पेंटिंग करने वाले मोहल्ला कटोराताल निवासी नन्हूं पेंटर कहते हैं कि एक दशक पूर्व तक ढाई-तीन महीने पहले ही चुनावों में वाल पेंटिंग शुरू हो जाती थी लेकिन इस चुनाव में तो ये काम पूरी तरह से खत्म हो गया है। काशीपुर में पहले 85 पेंटर थे, अब सिर्फ 15 ही बचे हैं। बाकी ने अपना पेशा बदल दिया है।
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अब स्लोगन और चित्रकारी का सहारा
पेंटर मौ. मियां ने बताया कि पूर्व में वह वाल पेंटिंग के साथ ही बैनर लिखने का भी काम करते थे, लेकिन अब सिर्फ शिलापट लेखन का काम ही बचा है। पेंटर फैक्टरियों और स्कूलों में स्लोगन और चित्रकारी के सहारे अपना भरण पोषण कर रहे हैं।
लोन चुकाने के लाले
प्रिंटिग प्रेस स्वामी जतिन नरुला ने बताया कि मल्टीप्रिंट के क्षेत्र में बड़े और अच्छे क्लाइंट थे, लेकिन कोविड के बाद किस्मत ने पलटी मार दी। पिछले छह महीने तक उनका कारोबार ठप है। चुनाव के दौर में भी उनके कारोबार में कोई रंगत नहीं आई है। जतिन कहते हैं कि प्रिंटिंग इंडस्ट्रीज की हालत पहले से खराब थी। बैंकों से लोन लेकर जो लोग कारोबार कर रहे हैं वो भी लोन चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। बड़े इवेंट्स न होने छपाई का काम भी प्रभावित हुआ है।
प्रचार को रिकार्डिंग के धंधे पर भी फिरा पानी
काशीपुर। अपनी सुरीली आवाज से विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के प्रचार की रिकार्डिंग करने वाले साबिर हुसैन एनाउंसर ने बताया कि चुनाव आयोग की सख्ती ने उनके कारोबार पर भी असर डाला है। प्रचार की वाइस रिकार्डिंग का परीक्षण अब जिला निर्वाचन कार्यालय से हो रहा है। निर्विवाद रिकार्डिंग की अनुमति के आधार पर ही ई-रिक्शाओं के माध्यम से प्रचार किया जाएगा। साबिर ने बताया कि पहले सिर्फ आधार कार्ड पर ई-रिक्शा चालक को प्रचार के लिए अनुमति मिल जाती थी, जबकि इस बार ई-रिक्शा चालक को पंजीकरण प्रमाण पत्र, डीएल, आधार कार्ड व अन्य प्रपत्र जमा करने पड़ रहे हैं। ऐसे में पहले की तुलना में बहुत कम प्रचार वाहनों को अनुमति मिल रही है। (संवाद)
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चुुनाव प्रचार पर निर्वाचन आयोग के कड़े पहरे के चलते राजनीतिक दल अपने संकल्प पत्र सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। ऑनलाइन प्रचार के दौर में प्रत्याशी और समर्थकों के बीच फेसबुक पर सत्ता संग्राम छिड़ा है। व्हाट्सएप ग्रुपों में भी लाइव प्रचार का जोर है। मोबाइल पर ही चुनावी मैसेज भेजे जा रहे हैं। इंस्टाग्राम और ट्वीटर पर भी प्रत्याशी हाजिर हैं। प्रचार के लिए वॉइस मैसेज का भी सहारा लिया जा रहा है। डिजिटल दौर में हुनरमंद पेंटरों की रोटी रोजी पर बन आई है।
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पेशा बदलने की मजबूरी
25 सालों से पेंटिंग करने वाले मोहल्ला कटोराताल निवासी नन्हूं पेंटर कहते हैं कि एक दशक पूर्व तक ढाई-तीन महीने पहले ही चुनावों में वाल पेंटिंग शुरू हो जाती थी लेकिन इस चुनाव में तो ये काम पूरी तरह से खत्म हो गया है। काशीपुर में पहले 85 पेंटर थे, अब सिर्फ 15 ही बचे हैं। बाकी ने अपना पेशा बदल दिया है।
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अब स्लोगन और चित्रकारी का सहारा
पेंटर मौ. मियां ने बताया कि पूर्व में वह वाल पेंटिंग के साथ ही बैनर लिखने का भी काम करते थे, लेकिन अब सिर्फ शिलापट लेखन का काम ही बचा है। पेंटर फैक्टरियों और स्कूलों में स्लोगन और चित्रकारी के सहारे अपना भरण पोषण कर रहे हैं।
लोन चुकाने के लाले
प्रिंटिग प्रेस स्वामी जतिन नरुला ने बताया कि मल्टीप्रिंट के क्षेत्र में बड़े और अच्छे क्लाइंट थे, लेकिन कोविड के बाद किस्मत ने पलटी मार दी। पिछले छह महीने तक उनका कारोबार ठप है। चुनाव के दौर में भी उनके कारोबार में कोई रंगत नहीं आई है। जतिन कहते हैं कि प्रिंटिंग इंडस्ट्रीज की हालत पहले से खराब थी। बैंकों से लोन लेकर जो लोग कारोबार कर रहे हैं वो भी लोन चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। बड़े इवेंट्स न होने छपाई का काम भी प्रभावित हुआ है।
प्रचार को रिकार्डिंग के धंधे पर भी फिरा पानी
काशीपुर। अपनी सुरीली आवाज से विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के प्रचार की रिकार्डिंग करने वाले साबिर हुसैन एनाउंसर ने बताया कि चुनाव आयोग की सख्ती ने उनके कारोबार पर भी असर डाला है। प्रचार की वाइस रिकार्डिंग का परीक्षण अब जिला निर्वाचन कार्यालय से हो रहा है। निर्विवाद रिकार्डिंग की अनुमति के आधार पर ही ई-रिक्शाओं के माध्यम से प्रचार किया जाएगा। साबिर ने बताया कि पहले सिर्फ आधार कार्ड पर ई-रिक्शा चालक को प्रचार के लिए अनुमति मिल जाती थी, जबकि इस बार ई-रिक्शा चालक को पंजीकरण प्रमाण पत्र, डीएल, आधार कार्ड व अन्य प्रपत्र जमा करने पड़ रहे हैं। ऐसे में पहले की तुलना में बहुत कम प्रचार वाहनों को अनुमति मिल रही है। (संवाद)

जतिन नरूला। संवाद- फोटो : KASHIPUR

मिया पेंटर। संवाद- फोटो : KASHIPUR

नन्नू पेंटर- फोटो : KASHIPUR