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चैती मेले से घोड़ा खरीदकर ले जाती थी फूलन देवी
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
Updated Fri, 31 Mar 2017 12:23 AM IST
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घोड़ा
- फोटो : अमर उजाला
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धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ ही चैती मेला उम्दा नस्ल के घोड़ों के लिए भी मशहूर है। अपने समय के कई कुख्यात डाकू यहां से घोड़े खरीदकर ले जाते थे। बताते हैं कि डाकू फूलन देवी भी यहां से घोड़े खरीद ले जाती थी। वह चैती मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रसाद भी ग्रहण करती थी, लेकिन किसी को भनक नहीं लग पाती थी।
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टांडा (रामपुर) से घोड़े लेकर आए चौधरी शौकत अली ने कहा कि नखासा बाजार डेढ़ सौ साल पुराना है। चौधरी शौकत का खानदान पीढ़ियों से घोड़ों का व्यापार करता है। पहले उनके परदादा हुसैन ने नखासा बाजार लगाया। उनके बाद दादा चौधरी अली बहादुर फिर पिता चौधरी जफर अली ने यह काम संभाला। उनके दादा अलीबहादुर के समय सुल्ताना डाकू घोड़े खरीदता था।
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डाकू मान सिंह को भी चैती के घोड़े पसंद थे। यहां हर प्रांतों के अच्छी नस्ल के घोड़े आते थे इसलिए डाकू पंसद करते थे। उनके पिता चौधरी जफर अली के समय फूलन देवी भी देहाती महिला के भेष में आईं, उसने चैती मंदिर में प्रसाद चढ़ाया और घोड़ा खरीद ले गई किसी को भनक तक नहीं लगी।
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वाहनों को शौक बढ़ने से घटा घोड़ों का क्रेज
चौधरी शौकत अली ने बताया कि चैती मेला में पहले पंजाब, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, कश्मीर, यूपी के बदायूं रामपुर, बहेड़ी, नैनीताल, रानगर से घोड़े बिकने आते थे। मेरठ छावनी, बाबू गढ़ छावनी, गौशाला, बरेली छावनी, दिल्ली छावनी के लिए यहां से घोड़े खरीदे जाते थे। वक्त बदल गया अब लग्जरी कारें आने से घोड़ा पालने के शौकीनों की कमी आ गई है। एक साल पहले तक छोटे घोड़ों को लोग तागों के लिए खरीदते थे। ई-रिक्शा के आने से लोगों ने तांगे बेच दिए।
घोड़ी की कीमत एक लाख तीस हजार
बृहस्पतिवार तक अधिकांश छोटी नस्ल के घोड़े आए हैं। एकमात्र बरेली निवासी वीरेश महंगी घोड़ी लेकर आए हैं। यह चार साल की है। सवा पांच फीट ऊंची अबलख (लाल सफेद रंग) है। इसकी कीमत एक लाख 30 हजार है। अभी तक यह सबसे मंहगी घोड़ी है। बाकी छोटी नस्ल के हैं। आज एक मात्र तीस हजार की छोटी नस्ल की घोड़ी बिकी है। दरअसल व्यापारी लुधियाना, अमृतसर पंजाब, मल्होत्रा (राजस्थान) से अच्छी नस्ल के घोड़े लेकर आते है। जो अभी नहीं पहुंचे है।