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Uk: पंतनगर विश्वविद्यालय का 37वां दीक्षांत समारोह का आयोजन, 1395 विद्यार्थियों ने उपाधियां प्रदान की

Tue, 07 Apr 2026 12:15 PM IST
गायत्री जोशी अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: गायत्री जोशी Updated Tue, 07 Apr 2026 12:15 PM IST
सार

गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने 1395 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। उन्होंने कहा कि डिग्री केवल प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण की जिम्मेदारी का प्रतीक है।

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Pantnagar University held its 37th convocation ceremony, conferring degrees to 1395 students
पंतनगर के दीक्षांत समारोह में बोलते राज्यपाल व विवि के कुलाधिपति सेनि. लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज आप जिस डिग्री को प्राप्त कर रहे हैं वह केवल एक प्रमाणपत्र नहीं है, ये आपके ज्ञान, परिश्रम और समर्पण का प्रतीक है। साथ ही यह एक जिम्मेदारी भी है। अपने ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए करें। ये बातें गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के 37वें दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल एवं विवि के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहीं।

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विवि परिसर के गांधी हॉल में मंगलवार को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। कार्य में राज्यपाल ने 1395 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। समारोह में 13 स्वर्ण, 12 रजत और 10 कांस्य पदक सर्वोत्तम स्नातकों को दिए गए। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय देश में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ाना देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इन विधाओं में किसानों को दक्ष करने के लिए कई कार्यक्रम किए जा रहे हैं।

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उन्होंने विश्वास जताया कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के सपने को वर्ष 2047 से पहले ही पूरा कर देंगे। उन्होंने कहा कि आज का युग नवाचार का युग है। कृषि में भी नई तकनीकों जैसे ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्रिसिजन फार्मिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

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राज्यपाल ने कहा कि कृषि के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन की है। अनियमित वर्षा, तापमान में अचानक वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव सीधे कृषि पर पड़ रहा है। पंतनगर विश्वविद्यालय जलवायु किस्मों का विकास, जन संरक्षण तकनीकों का प्रसार और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर विशेष जोर दे रहा है।

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