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इतिहास बन गए खटीमा के थियेटर
प्रवीन कोहली /अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
Updated Sun, 10 Dec 2017 12:32 AM IST
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खटीमा का प्रेम टाकीज
- फोटो : अमर उजाला
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कभी तीन थियेटर वाले शहर में आज एक भी सिनेमाघर नहीं है। तीन में से दो थियेटर रखरखाव के अभाव में खंडहर हो गए हैं। जबकि एक में वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न कराए जाते हैं। कभी सारे हाउसफुल शो चलाने वाले तीनो तीनों हॉल अब इतिहास बन चुके।
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70 के दशक में खटीमा के पिक्चर हॉल आबाद थे। यहां मुगल-ए-आजम, मदर इंडिया, नदियां के पार, शोले, डर, बाजीगर जैसी हिट फिल्में खूब चलीं।
सबसे लंबे समय तक हाल में चलने वाली फिल्म का रिकार्ड ‘नदियां के पार’ का है। यह फिल्म यहां 45 दिन तक चली। मुख्य चौक के पास स्थित उत्सव रेस्ट हाउस वाले स्थान पर 1965 के आसपास फट्टा टॉकीज खोला गया था। यह खटीमा का पहला सिनेमाघर था। इसके बाद पहला पिक्चर हाल शारदा टॉकीज 1972 में खोला गया। इसके बाद 28 जनवरी 1986 को कृष्णा टाकीज, चार जुलाई 1986 को प्रेम टाकीज खोला गया। यह सभी पिक्चर हाल आज बंद हो चुके हैं। शारदा टाकीज में बारातघर चल रहा है।
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इंटरनेट और स्मार्ट फोन ने तोड़ी कमर
नगर में पिक्चर हाल व्यवसाय में पंजाबी परिवारों का एकाधिकार था। यहां के तीनों सिनेमाघरों के बंद होने के सवाल पर नगर के प्रमुख उद्योगपति अनिल बत्रा कहते हैं स्मार्टफोन और इंटरनेट के प्रसार ने सिनेमाघरों की कमर तोड़ दी। डीवीडी लेकर भी कम खर्च में लोग अपने घरों में परिवार संग फिल्म देख लेते हैं। हालांकि युवाओं का कहना है कि शहर में एक मल्टीप्लेक्स होना चाहिए।
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अमाऊं में खुला है वीडियो सिनेमा हाल
नगर में पिक्चर हाल भले ही न हों लेकिन अमाऊं में मंत्रा क्लब के ट्रेनर रमेश चौहान ने वीडियो सिनेमा हाल खोला हुआ है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल में जहां पिक्चर हाल नहीं होते वहां बाजार में फिल्म की सीडी उपलब्ध होने के बाद यहां फिल्म देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके यहां एक बार में 100 लोग फिल्म देख सकते हैं। उन्होंने बताया कि स्क्रीन का पर्दा बीस फुट तक चौड़ा है।
चार आने में देखी ‘धूल का फूल’
जहां आज उत्सव रेस्ट हाउस है उस जगह कभी नगर का पहला सिनेमाघर टूरिंग टाकीज हुआ करता था। यहां रहने वाले पुराने वाशिंदों में से एक जगदीश चंद्र पांडे बताते हैं कि उस समय यहां उन्होंने धूल का फूल फिल्म देखी थी। इसमें जमीन पर बैठकर फिल्म देखने में 25 पैसे व बैंच में बैठकर देखने के 80 पैसे लिए जाते थे। दिगंबर गुप्ता बताते है कि टूरिंग के बाद शहर में शारदा टाकीज खुला। इसमें बालकनी का टिकट 70 पैसे था। अशोक बत्रा बताते हैं कि उन्होंने प्रेम टाकीज में अमिताभ बच्चन की फिल्म आखिरी रास्ता और कृष्णा टाकीज में जैकी श्रॉफ की तेरी मेहरबानियां फिल्म लगी थी। तब टिकट सवा दो रुपये का हुआ करता था।