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किसानों को चूना लगाने की साजिश तो नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Mon, 23 May 2016 10:57 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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तराई में पिछले पांच साल से बरामद हो रही नकली नोटों की खेप कहीं किसानों को चूना लगाने के लिए तो नहीं भेजी जा रही है। जिस तरह से तराई में ही नकली नोटों की खेप बरामद हुई है वह इसी ओर इशारा कर रही है। वर्तमान में किसान गेहूं की कटाई के बाद अपनी उपज को बेचने में लगा हुआ है। ऐसे में नकली नोटों के सौदागरों द्वारा किसानों को ठगी का शिकार बनाए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।
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तराई की बेल्ट खेती किसानी के लिए विख्यात है। गेहूं, धान के साथ ही अन्य फसलों की यहां पर बंपर पैदावार होती है। अपनी उपज का बेहतर दाम पाने को लालायित रहते हैं। वहीं नकली नोटों के सौदागर फेक करेंसी को किसी न किसी बहाने ठिकाने लगाने की जुगत में लगे रहते हैं।
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वह ऐसे लोगों की तलाश में रहते हैं जो अपने सामान के बदले अधिक करेंसी की चाह रखते हैं। इतना ही नहीं तराई के किसान भी अपनी उपज का बेहतर मूल्य पाने की कोशिश करते रहते हैं, ऐसे में नकली नोटों के सौदागरों द्वारा किसानों को ठगे जाने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि इस बात की पुष्टि फिलहाल तो नहीं हुई है लेकिन संभावना जताई जा रही है कि काफी हद तक नकली नोटों के सौदागर किसानों को अपने झांसे में ले सकते हैं।
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तराई में जिस तरह से गेहूं की कटाई के सीजन में नकली नोटों की खेप बरामद की गई है, वह कहीं न कहीं तो इशारा करती है। हो सकता है कि गेहूं की उपज के बदले नकली नोट किसानों को थमाए जाने के लिए ही यहां भेजे गए हों। किसानों को भी इस तरह के लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी तरह की शंका होने पर नजदीकी पुलिस चौकी या थाने से संपर्क कर ठगी का शिकार होने से बचा जा सकता है।
-पंकज भट्ट, अपर पुलिस अधीक्षक