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सड़कों पर न तो जेब्रा क्रॉस बनाए, न ही इंडिकेटर लगे
अमर उजाला ब्यूरो सितारगंज
Updated Fri, 17 Mar 2017 11:59 PM IST
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सितारगंज से किच्छा तक फोरलेन और सितारगंज से टनकपुर तक टू लेन सड़क निर्माण कर रही कंपनियों की लापरवाही से मासूमों को जान गंवानी पड़ रही है। तीन माह में छह लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और कई लोग घायल हो गए हैं। इन कंपनियों के खिलाफ न तो प्रशासन कोई एक्शन लेता है और न ही हादसों को रोकने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र के लोगों में प्रशासन और निर्माण कंपनियों के खिलाफ गहरा आक्रोश है।
सितारगंज से काशीपुर तक गल्फार कंपनी द्वारा फोरलेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है। किच्छा जाने के लिए नगर के अमरिया चौराहे से जनताफार्म होते बाईपास का निर्माण किया गया है, लेकिन मुख्य शहर से वीरेंद्रनगर होकर किच्छा जाने वाले पुराने मार्ग को निर्माण कंपनी ने नहीं सुधारा। यहां तक कि अनुग्रह आश्रम से आगे बाईपास सड़क में मिली पुरानी सड़क पर कोई भी क्रॉसिंग नहीं दी गई है। इससे शहर से जाने वाले वाहनों को उलटी दिशा से गुजरना पड़ता है। मार्ग की दुर्दशा के चलते 31 दिसंबर को गदरपुर के दो सगे साढुओं प्रेम बिष्ट, कमल चौधरी की हादसे में मौत हो गई थी। बिज्टी चौराहे पर निर्माण कंपनी एचजी इंफ्रा ने न तो कोई इंडिकेटर लगाए और न ही सड़क पर जेब्रा क्रॉस बनाए। यहां तक कि बिज्टी चौराहे पर गोल चौक तक नहीं बनाया गया है। शहर में एंट्री करने तक कहीं भी कार्य प्रगति की चेतावनी के बोर्ड नहीं लगाए गए। निर्माण कंपनियां मनमाने तरीके से सड़कों का निर्माण कर रही हैं। इसका खामियाजा दुर्घटनाओं के रूप में भुगतना पड़ रहा है। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से कंपनियों की लापरवाही के खिलाफ शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में प्रशासन व निर्माण कंपनियों के खिलाफ रोष है।
सात मार्च को बिजली के पोल के लिए खोदे गए गड्ढे में एक युवती के गिरकर रातभर फंसे रहने के मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि पोल लगाने वाली कंपनी के कारिंदों की इसमें लापरवाही उजागर हुई थी। डीएम चंद्रेश यादव ने इस मामले को गंभीर माना था और मामले में जांच कराने के बाद कड़ी कार्रवाई करने की बात कही थी। एसडीएम विनोद कुमार ने भी संबंधित कंपनी और अफसर के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन बाद में यह मामला भी ठंडा हो गया। प्रशासन के लापरवाह कंपनी, अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने से उनके हौसले बुलंद हैं। ब्यूरो
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। शहर में दो साल के भीतर दूसरी बार बड़ा हादसा हुआ है। सात अगस्त 2015 को बेकाबू ट्रक के एसएम पब्लिक स्कूल गेट पर पलटने से उसके नीचे दबकर दो शिक्षिकाओं कसाना परवीन सैफी, छात्र मो. अनस, छात्रा समीरा गाजी की मौत हो गई थी। इससे शहर के लोगों ने कड़ा आक्रोश जताया था। तत्कालीन डीएम, एसएसपी ने दुर्घटनास्थल का मुआयना करने के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम को बुलाकर मौके से सैंपल लिए थे। शुक्रवार को फिर चार लोग दुर्घटना का शिकार बन गए और भूड़ा कैमोर थाना अमरिया के हरचरन सिंह, हरिशंकर, शेर सिंह, सीताराम को अपनी जान गंवानी पड़ी।
क्षेत्र में खनन का कारोबार होने से सारा दिन ओवरलोड वाहन सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। यह हाइकोर्ट के आदेशों की खुली धज्जियां उड़ा रहे हैं। यही नहीं, चौराहों पर तैनात रहने वाले पुलिस कर्मी भी ओवरलोड वाहनों से अपनी नजर बचाते दिखते हैं। यहां औद्योगिक नगरी होने के साथ ही यहां खनन का कारोबार भी बड़े स्तर पर होता है। कैलाश नदी के नंधौर, उकरौली, साधूनगर खनन क्षेत्र में सैकड़ों वाहन खनन के कार्य में लगे हैं। क्षेत्र में करीब आधा दर्जन स्टोन क्रशर भी हैं। नदी से स्टोन क्रशर, क्रशर से बाहरी शहरों को उपखनिज लाने-ले जाने के लिए सैकड़ों हाइवा, डंपर, ट्रैक्टर ट्राली चलते हैं। हाइकोर्ट ने भारी वाहनों में ओवरलोडिंग पर पूर्णत: प्रतिबंध के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में खनन सामग्री ढोने वाले डंपर, ट्रक, हाइवा ओवरलोड चल रहे हैं, लेकिन इस ओर न तो पुलिस का ध्यान जाता है और न ही स्थानीय प्रशासन इसको लेकर गंभीर है। राजस्व विभाग दिनभर नदी में अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई में लगा रहता है लेकिन, नदी से ही ओवरलोड चलने वाले वाहनों पर कभी कार्रवाई नहीं होती।
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सितारगंज से काशीपुर तक गल्फार कंपनी द्वारा फोरलेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है। किच्छा जाने के लिए नगर के अमरिया चौराहे से जनताफार्म होते बाईपास का निर्माण किया गया है, लेकिन मुख्य शहर से वीरेंद्रनगर होकर किच्छा जाने वाले पुराने मार्ग को निर्माण कंपनी ने नहीं सुधारा। यहां तक कि अनुग्रह आश्रम से आगे बाईपास सड़क में मिली पुरानी सड़क पर कोई भी क्रॉसिंग नहीं दी गई है। इससे शहर से जाने वाले वाहनों को उलटी दिशा से गुजरना पड़ता है। मार्ग की दुर्दशा के चलते 31 दिसंबर को गदरपुर के दो सगे साढुओं प्रेम बिष्ट, कमल चौधरी की हादसे में मौत हो गई थी। बिज्टी चौराहे पर निर्माण कंपनी एचजी इंफ्रा ने न तो कोई इंडिकेटर लगाए और न ही सड़क पर जेब्रा क्रॉस बनाए। यहां तक कि बिज्टी चौराहे पर गोल चौक तक नहीं बनाया गया है। शहर में एंट्री करने तक कहीं भी कार्य प्रगति की चेतावनी के बोर्ड नहीं लगाए गए। निर्माण कंपनियां मनमाने तरीके से सड़कों का निर्माण कर रही हैं। इसका खामियाजा दुर्घटनाओं के रूप में भुगतना पड़ रहा है। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से कंपनियों की लापरवाही के खिलाफ शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में प्रशासन व निर्माण कंपनियों के खिलाफ रोष है।
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सात मार्च को बिजली के पोल के लिए खोदे गए गड्ढे में एक युवती के गिरकर रातभर फंसे रहने के मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि पोल लगाने वाली कंपनी के कारिंदों की इसमें लापरवाही उजागर हुई थी। डीएम चंद्रेश यादव ने इस मामले को गंभीर माना था और मामले में जांच कराने के बाद कड़ी कार्रवाई करने की बात कही थी। एसडीएम विनोद कुमार ने भी संबंधित कंपनी और अफसर के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन बाद में यह मामला भी ठंडा हो गया। प्रशासन के लापरवाह कंपनी, अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने से उनके हौसले बुलंद हैं। ब्यूरो
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। शहर में दो साल के भीतर दूसरी बार बड़ा हादसा हुआ है। सात अगस्त 2015 को बेकाबू ट्रक के एसएम पब्लिक स्कूल गेट पर पलटने से उसके नीचे दबकर दो शिक्षिकाओं कसाना परवीन सैफी, छात्र मो. अनस, छात्रा समीरा गाजी की मौत हो गई थी। इससे शहर के लोगों ने कड़ा आक्रोश जताया था। तत्कालीन डीएम, एसएसपी ने दुर्घटनास्थल का मुआयना करने के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम को बुलाकर मौके से सैंपल लिए थे। शुक्रवार को फिर चार लोग दुर्घटना का शिकार बन गए और भूड़ा कैमोर थाना अमरिया के हरचरन सिंह, हरिशंकर, शेर सिंह, सीताराम को अपनी जान गंवानी पड़ी।
क्षेत्र में खनन का कारोबार होने से सारा दिन ओवरलोड वाहन सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। यह हाइकोर्ट के आदेशों की खुली धज्जियां उड़ा रहे हैं। यही नहीं, चौराहों पर तैनात रहने वाले पुलिस कर्मी भी ओवरलोड वाहनों से अपनी नजर बचाते दिखते हैं। यहां औद्योगिक नगरी होने के साथ ही यहां खनन का कारोबार भी बड़े स्तर पर होता है। कैलाश नदी के नंधौर, उकरौली, साधूनगर खनन क्षेत्र में सैकड़ों वाहन खनन के कार्य में लगे हैं। क्षेत्र में करीब आधा दर्जन स्टोन क्रशर भी हैं। नदी से स्टोन क्रशर, क्रशर से बाहरी शहरों को उपखनिज लाने-ले जाने के लिए सैकड़ों हाइवा, डंपर, ट्रैक्टर ट्राली चलते हैं। हाइकोर्ट ने भारी वाहनों में ओवरलोडिंग पर पूर्णत: प्रतिबंध के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में खनन सामग्री ढोने वाले डंपर, ट्रक, हाइवा ओवरलोड चल रहे हैं, लेकिन इस ओर न तो पुलिस का ध्यान जाता है और न ही स्थानीय प्रशासन इसको लेकर गंभीर है। राजस्व विभाग दिनभर नदी में अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई में लगा रहता है लेकिन, नदी से ही ओवरलोड चलने वाले वाहनों पर कभी कार्रवाई नहीं होती।