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मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में यूएसनगर अव्वल
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रुद्रपुर। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए ऋण देने में यूएसनगर ने प्रदेश के अन्य जिलों को पछाड़ दिया है। जिले के लिए निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 78 फीसदी आवेदकों को ऋण वितरित किया जा चुका है। इसके बाद दूसरे नंबर पर पौड़ी गढ़वाल में लक्ष्य के सापेक्ष 63 फीसदी आवेदकों को ऋण वितरित हो चुका है। सबसे कमजोर अल्मोड़ा जिले का प्रदर्शन है, जहां लक्ष्य के सापेक्ष 15.60 फीसदी आवेदकों को ही ऋण दिया गया है।
दरअसल मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत शिक्षित बेरोजगारों, हस्त शिल्पियों और कोविड-19 के चलते प्रदेश में लौटे प्रवासियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है। योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे, इसके लिए जिलों के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश में 13 जिलों के लिए तीन हजार आवेदकों को ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 16 जनवरी तक मिले आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के जिलों में गठित कमेटियों ने 7638 आवेदन मंजूर किए हैं और 601 आवेदन प्रक्रिया में हैं।
इसके अलावा 814 आवेदन बैंकों ने खामियां गिनाकर लौटा दिए हैं और 2173 आवेदन निरस्त किए जा चुके हैं। इसके अलावा 2539 आवेदन बैंकों ने स्वीकृत किए हैं। आंकड़ों को देखें तो ऋण वितरण में ऊधमसिंह नगर की स्थिति अन्य जिलों के मुकाबले बेहतर है। जिले में स्वीकृत आवेदनों के सापेक्ष 84 फीसदी जबकि लक्ष्य के सापेक्ष 78 फीसदी आवेदकों को ऋण दिया जा चुका है। दिलचस्प बात है कि दो महीने पहले योजना में हीलाहवाली पर डीएम ने एक जिलास्तरीय अधिकारी का एक महीने का वेतन रोक दिया था।
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जिला लक्ष्य बैंकों से स्वीकृत लक्ष्य के सापेक्ष ऋण वितरण का प्रतिशत
अल्मोड़ा 250 151 15.60
बागेश्वर 200 165 45
चंपावत 250 222 58
चमोली 250 175 40 .80
देहरादून 200 163 50
हरिद्वार 200 112 27
नैनीताल 250 181 58.80
पौड़ी 250 277 63. 20
पिथौरागढ़ 250 171 48.40
रूद्रप्रयाग 200 164 51.50
टिहरी 250 198 18.80
ऊधमसिंह नगर 200 185 78
उत्तरकाशी 250 375 69.60
मेरे और सीडीओ स्तर से योजना की लगातार निगरानी से अन्य जिलों की तुुलना में जिला बेहतर स्थिति में है। उद्योग विभाग के एक कार्मिक की ड्यूटी रोजाना बैंकों और आवेदकों से बातचीत कर ऋण स्वीकृत कराने में लगाई है। इससे योजना की प्रगति में काफी फर्क पड़ा है। 31 जनवरी तक अधिकारियों को 200 का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। - रंजना राजगुरु, डीएम।
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दरअसल मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत शिक्षित बेरोजगारों, हस्त शिल्पियों और कोविड-19 के चलते प्रदेश में लौटे प्रवासियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है। योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे, इसके लिए जिलों के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश में 13 जिलों के लिए तीन हजार आवेदकों को ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 16 जनवरी तक मिले आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के जिलों में गठित कमेटियों ने 7638 आवेदन मंजूर किए हैं और 601 आवेदन प्रक्रिया में हैं।
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इसके अलावा 814 आवेदन बैंकों ने खामियां गिनाकर लौटा दिए हैं और 2173 आवेदन निरस्त किए जा चुके हैं। इसके अलावा 2539 आवेदन बैंकों ने स्वीकृत किए हैं। आंकड़ों को देखें तो ऋण वितरण में ऊधमसिंह नगर की स्थिति अन्य जिलों के मुकाबले बेहतर है। जिले में स्वीकृत आवेदनों के सापेक्ष 84 फीसदी जबकि लक्ष्य के सापेक्ष 78 फीसदी आवेदकों को ऋण दिया जा चुका है। दिलचस्प बात है कि दो महीने पहले योजना में हीलाहवाली पर डीएम ने एक जिलास्तरीय अधिकारी का एक महीने का वेतन रोक दिया था।
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जिला लक्ष्य बैंकों से स्वीकृत लक्ष्य के सापेक्ष ऋण वितरण का प्रतिशत
अल्मोड़ा 250 151 15.60
बागेश्वर 200 165 45
चंपावत 250 222 58
चमोली 250 175 40 .80
देहरादून 200 163 50
हरिद्वार 200 112 27
नैनीताल 250 181 58.80
पौड़ी 250 277 63. 20
पिथौरागढ़ 250 171 48.40
रूद्रप्रयाग 200 164 51.50
टिहरी 250 198 18.80
ऊधमसिंह नगर 200 185 78
उत्तरकाशी 250 375 69.60
मेरे और सीडीओ स्तर से योजना की लगातार निगरानी से अन्य जिलों की तुुलना में जिला बेहतर स्थिति में है। उद्योग विभाग के एक कार्मिक की ड्यूटी रोजाना बैंकों और आवेदकों से बातचीत कर ऋण स्वीकृत कराने में लगाई है। इससे योजना की प्रगति में काफी फर्क पड़ा है। 31 जनवरी तक अधिकारियों को 200 का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। - रंजना राजगुरु, डीएम।