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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   Kaliwala village will become hub of folk art

लोककला का हब बनेगा कलियावाला गांव

Mon, 20 Mar 2017 12:05 AM IST
शौकत राही/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
शौकत राही/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर Updated Mon, 20 Mar 2017 12:05 AM IST
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अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो आने वाले समय में गांव कलियावाला में लोगों को लोककला के दर्शन होंगे। इस कला को जिंदा करने को पांच विदेशियों समेत दस कलाकार गांव पहुंच गए हैं। ये कलाकार अपनी कला के जरिए लोककला को लोगों के बीच पहुंचाएंगे। टेल अस आर्ट संस्था ने गांव में आर्ट रेजीडेंसी तैयार कर दी है। इस रेजीडेंसी के प्रत्येक कमरे में लोककला को देखा जा सकता है।

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बाजपुर निवासी अजमेर सिंह संधू की बहन कुलवंत कौर कलियावाला गांव में रहती है। संधू डेनमार्क में अपनी संस्था ‘टेल अस आर्ट’ को चलाते हैं। इस संस्था से देसी एवं विदेशी कलाकार जुड़े हैं। कलियावाला गांव में डेनमार्क, स्वीडन से लीसा, लीना, बैनी, दीतर, परनिले समेत भारत की रूबी शर्मा, एलएन नागा, यूसुफ, तबस्सुम, दिव्या आए हैं। 
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ये सभी कलाकर टेल अस आर्ट संस्था की ओर से अपनी कला का जादू बिखेर रहे हैं। टेल अस आर्ट के संस्थापक अजमेर सिंह संधू कलियावाला में लोककला का हब बनाने की तैयारी में जुटे हैं। मंगलवार को स्क्रैप (कबाड़) से यूसुफ ने तोप, नागा, निशा, दिव्या ने स्क्रैप सुंदरी, सुंदरा आदि बनाए, जबकि लीशा एवं लीना ने सीमेंट बालू से मूर्तियां बनाईं। सोफे, टेबल, चारपाई, छप्पर भी पुरानी कला की याद ताजा करा रही हैं। सभी कलाकृतियां आकर्षण का केंद्र बनी हैं। 
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संस्थापक संधू ने बताया कि पर्यावरण सुरक्षा एवं मानव संस्कृति को जिंदा करने के उद्देश्य से संस्था काम कर रही है। इसके तहत विदेशी नागरिकों ने पेंटिंग बनाकर ग्रामीण संस्कृति को उकेरा। आर्ट रेजीडेंसी के कमरे में लोककला देखने को मिलेगी। संधू ने बताया कि रेजीडेंसी में आने के बाद इंसान अपनी संस्कृति को महसूस करेगा। संधू ने बताया कि विदेशी कलाकार हिंदुस्तान की कला को समझने के साथ भारतीय कलाकारों के साथ मिलकर कलात्मक गतिविधियों को रूप देंगे। 

ढाई एकड़ में बनेगा कला का हब
संधू ने बताया कि ढाई एकड़ में कला का हब बनाया जाएगा। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। संधू ने बताया कि संस्था का 113 देशों में नेटवर्क है। वह जिस देश में जाते हैं, उस देश के कलाकारों को एकत्र कर खत्म हो रही लोकसंस्कृति को जिंदा करने का प्रयास करते हैं। 

मशहूर चित्रकार यूसुफ चाहते हैं कलियावाला बने कलावाला
देश के टॉप टेन चित्रकारों में शामिल मशहूर चित्रकार यूसुफ कलियावाला गांव में लोककला एवं आदिवासी कला का समावेश कर कला का दृश्य बनाना चाहते हैं। यूसुफ ने बताया कि कला का हब बनने से अंतरराष्ट्रीय कलाकारों को यहां आने का मौका मिलेगा। यह गांव कलियावाला की जगह कलावाला कहलाएगा। यूसुफ नेशनल एवं इंटरनेशनल सम्मान से नवाजे जा चुके हैं। 


परनिले ने सिखाया खेल खेल में पढ़ाई का कोर्स
विदेश की तर्ज पर छोटे बच्चों को बस्ते से मुक्ति दिलाने को डेनमार्क की शिक्षक परनिले तोफ्त ने गांव कलियावाला में टेल अस आर्ट अकादमी द्वारा गोद लिए गए स्कूल के शिक्षकों को खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाने का दस दिवसीय कोर्स कराया। 57 वर्षीय परनिले ने बताया कि वह पिछले 30 सालों से विदेशों में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही हैं। 

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