फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   Growing discontent in Sidcul industries deadly

सिडकुल में बढ़ता असंतोष उद्योगों के लिए घातक

Mon, 23 May 2016 11:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर Updated Mon, 23 May 2016 11:01 AM IST
विज्ञापन
Growing discontent in Sidcul industries deadly
असंतोष - फोटो : अमर उजाला

सिडकुल में बढ़ता श्रमिक असंतोष जहां कल-कारखानों के लिए घातक साबित होता जा रहा है, वहीं श्रमिकों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो सकता है। अगर यही हाल रहा तो उद्यमी सिडकुल से पलायन करने को बाध्य हो जाएंगे। इसलिए उद्योगों में श्रमिकों और प्रबंधन के बीच बेहतर सामंजस्य बना रहना जरूरी है। वर्तमान में पंतनगर सिडकुल की फैक्ट्रियों में पहाड़ के करीब साठ फीसदी युवाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है। 

विज्ञापन


तत्कालीन मुख्यमंत्री पं. नारायण दत्त तिवारी ने वर्ष 2004 में सिडकुल की स्थापना की थी। सिडकुल की स्थापना के बाद से ही औद्योगिक इकाइयों में श्रमिक असंतोष की चिंगारी फूटने लगी। श्रमिक असंतोष का सबसे पहला दंश डाबर इंडिया लिमिटेड कंपनी को झेलना पड़ा था। 
विज्ञापन


स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग ने इस कदर जोर पकड़ा कि तत्कालीन कारखाना प्रबंधकों को भी उनकी मांगों पर गौर करना पड़ा और आज सिडकुल की सभी फैक्ट्रियों में 60 फीसदी के आसपास पहाड़ के युवा काम कर रहे हैं। भले ही वह मैनेजमेंट डिपार्टमेंट से जुड़े हों या फिर कांट्रेक्ट बेस पर काम कर रहे हों। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सभी को घर के नजदीक काम मिल गया। कुछ साल तक तो सब कुछ ठीकठाक रहा, लेकिन जब से श्रमिक हितों की पैरोकारी का झंडा बुलंद हुआ तभी से औद्योगिक विकास की अवधारणा को ही ग्रहण लग गया। सिडकुल में दिन पर दिन बढ़ रहे श्रमिक असंतोष को रोकने के लिए जिला प्रशासन को भी संजीदगी से काम लेना होगा। वहीं कारखाना प्रबंधन और श्रमिकों को आपसी सामंजस्य बनाकर काम करना होगा, तभी पंतनगर में औद्योगिक विकास की अवधारणा सफल हो पाएगी। 

मांगों को बातचीत से सुलझाएं
जिस तरह से सिडकुल में औद्योगिक अशांति का माहौल बना हुआ है, वह उद्योग समूहों के लिए घातक है। वहीं इससे श्रमिकों के समक्ष भी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा। श्रमिकों को अपनी मांगों को बातचीत से ही सुलझाना चाहिए। फैक्ट्री प्रबंधन श्रमिक हितों की अनदेखी कभी नहीं करता। हां मानदेय को लेकर कुछ विवाद होता भी है तो उसे प्रबंधन के साथ वार्ता कर निपटाया जा सकता है। काम बंद करने से फैक्ट्री तो बंद होगी ही श्रमिकों की रोजी रोटी भी छिन जाएगी। ऐसे में श्रमिकों को धैर्य से काम लेने की जरूरत है। 
- अजय तिवारी, अध्यक्ष सिडकुल इंटरप्रिन्योर वेलफेयर सोसायटी

कुछ स्वार्थी लोग वातावरण कर रहे खराब
सिडकुल की स्थापना के बाद हर व्यक्ति का जीवन स्तर ऊंचा उठा है। चाहे वह व्यक्ति छोटे से छोटा मजदूर हो या बड़े से बड़ेे उद्योगपति। इस क्षेत्र का सारा विकास सिडकुल और उद्योगों के विकास पर आधारित है, परंतु कुछ स्वार्थी लोगों द्वारा आए दिन श्रमिकों को गुमराह करके औद्योगिक वातावरण खराब करने का प्रयास किया जा रहा है, इससे उद्यमियों में भी भय का माहौल पैदा हो रहा है। सभी को साथ मिलकर सिडकुल के विकास में आगे आना चाहिए।

- हिमांशु शुक्ला, अध्यक्ष सिडकुल कांट्रेक्टर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन

समझौते के होते हैं प्रयास
जब भी फैक्ट्री के श्रमिक कलक्ट्रेट में आकर धरना-प्रदर्शन करते हैं और काम बंद कर हड़ताल होती है, तो जिला प्रशासन फैक्ट्री प्रबंधन और श्रमिकों के बीच बातचीत के माध्यम से समझौते का प्रयास करता है। कई कंपनियों में जब भी असंतोष पैदा हुआ तो जिला प्रशासन ने समझौता भी कराया और आंदोलन भी खत्म हुए। श्रमिकों को चाहिए कि पहला प्रयास आंदोलन की बजाए प्रबंधन के साथ बातचीत से ही समस्याओं का हल हो जाना चाहिए। 
-अक्षत गुप्ता, डीएम, यूएस नगर

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed