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धान खरीद के सरकारी क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा

Tue, 11 Oct 2016 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर Updated Tue, 11 Oct 2016 12:21 AM IST
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Government procurement of paddy purchase centers lies at the silence
ध्‍ाान - फोटो : अमर उजाला

धान खरीद के सरकारी केंद्रों में धान की फसल की खरीद न होने से और निजी आढ़तियों द्वारा फसल के औने-पौने दाम लगाने से किसानों का लगातार शोषण हो रहा है। जहां सरकारी केंद्र अपने मानकों का हवाला देकर किसानों की फसल न खरीद कर उन्हें टहला रहे हैं, वहीं इसका फायदा सीधे तौर पर आढ़तियों को मिल रहा है। किसानों की मजबूरी का फायदा उठा कर आढ़ती धान को मनमाने रेट में खरीद रहे हैं। 

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तराई विकास केंद्र मुख्यालय पर सोमवार को पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। केंद्र पर लगे फ्लैक्स बोर्ड पर धान खरीद का मूल्य 1470 रुपए लिखा हुआ है, लेकिन केंद्र पर किसानों द्वारा बेचने के लिये लाए जा रहे धान में मानक से अधिक नमी होने का हवाला देकर धान नहीं खरीदा जा रहा है। धान खरीद के सरकारी क्रय केंद्रों पर सरकार की ओर से धान की फसल में 17 फीसद नमी होने के मानक तय किए गए हैं। 
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वहीं इससे ज्यादा नमी होने पर सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों की फसल नहीं खरीदी जाती। वहीं पिछले सप्ताह हुई मूसलाधार बारिश से धान की फसल भीग जाने से उसमें नमी ज्यादा पैदा हो गई है। वहीं बारिश के कारण धान की फसल में नमी 25 फीसद तक हो गई है जो मानक से अधिक है। इधर निराश किसान आढ़तियों के पास धान बेच रहा है तो आढ़तियों द्वारा हजार रुपए क्विंटल के मूल्य पर धान खरीद की जा रही है। 
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इससे पहले भी किसानों ने धान खरीद में हो रही बेधड़क मनमानी को लेकर मंडी समिति में शिकायत की थी। किसानों ने मनमानी रोकने के लिये धर्मकांटों पर छापेमार की मांग भी की थी। धान खरीद में आढ़तियों द्वारा मनमाने दाम पर फसल खरीदने से किसानों में प्रशासन के खिलाफ काफी रोष है। 

पिछले वर्ष भी किसानों ने मंडी व्यवस्था पर सवालिया निशान उठाते हुए धान खरीद पर हो रही धांधली का मुद्दा उठाया था। वहीं आढ़तियों का कहना है कि इस बार बेमौसम बारिश होने से धान की फसल खराब हो गई है। जिसको वह महंगे दामों पर नहीं खरीद सकते।

सस्ता धान मिल में पहुंच कर हो जाता है महंगा
सस्ते दामों पर खरीदा गया धान मिल में जाकर किस आधार पर महंगा हो जाता है, इस प्रश्न का जवाब किसान भी पूछ रहा है। किसानों के अनुसार सस्ते दामों पर आढ़तियों द्वारा खरीदा धान मंडी पहुंच कर इतना महंगा हो जाता है कि आम इंसान उस धान को खरीद नहीं पाता।


17 और 25 के फेर में फंसे किसान
सरकारी धान खरीद केंद्रों में मानकों के अनुसार बिक्री के दौरान धान में 17 फीसद तक ही नमी होनी चाहिए। वहीं किसानों की धान फसल में 25 फीसद से अधिक नमी आ रही है। जिसको केंद्र स्वीकार नहीं कर रहा। इस कारण किसान आढ़तियों के चक्कर काटने में मजबूर हो रहे हैं।
गुरप्रीत सिंह, जगतार सिंह आदि थे।

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