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Exclusive: पर्वतीय किसानों को मालामाल करेगा थाई कुंभकाट नींबू, पौधे खरीदने के लिए उमड़े किसान; जानें खूबियां

Fri, 07 Mar 2025 12:26 PM IST
हीरा मेहरा सुरेंद्र कुमार वर्मा, संवाद
सुरेंद्र कुमार वर्मा, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Fri, 07 Mar 2025 12:26 PM IST
सार

पर्वतीय किसानों के लिए अच्छी खबर है। उनको थाईलैंड प्रजाति का कुंभकाट नींबू मालामाल कर सकता है। इस प्रजाति के नींबू के पौधे पहली बार पंतनगर किसान मेले में कोलकाता की शबनम नर्सरी के स्टाॅल पर उपलब्ध हैं। 

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farmers came to Shabnam Nursery stall to buy Thai Kumbhakat lemon before Kisan Mela started in pantnagar
कुंभकाट नीबू के बारे में जानकारी देते शबनम नर्सरी के आयन मंडल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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पर्वतीय क्षेत्रों या लंबे समय तक ठंड वाले स्थानों के किसानों के लिए अच्छी खबर है। उनको थाईलैंड प्रजाति का कुंभकाट नींबू मालामाल कर सकता है। इस प्रजाति के नींबू के पौधे पहली बार पंतनगर किसान मेले में कोलकाता की शबनम नर्सरी के स्टाॅल पर उपलब्ध हैं। मेला शुरू होने से पूर्व ही इसे खरीदने के लिए किसान स्टाॅल पर उमड़ रहे हैं।

 

स्टाॅल स्वामी आयन मंडल ने बताया कि ऑफ सीजन (जनवरी से अप्रैल) में उत्पादन देने वाली नींबू की अब तक की यह बेस्ट वैरायटी है। महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश आदि के किसान इस प्रजाति के पौधे बड़ी संख्या में लगा रहे हैं।

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सामान्य प्रजाति से जहां 25-30 किलो नींबू का उत्पादन होता है वहीं इस प्रजाति से ढाई साल बाद 70-75 किलो उत्पादन होता है। यह प्रजाति थाईलैंड की है। राजस्थान और पंजाब में जो प्रजाति लगाई जा रही है, वह पाकिस्तानी नींबू नाम से परिचित है। वहां यह थाई कुंभकाट नींबू से क्रॉस कर बनाई गई है। इसका छिलका बहुत पतला और उसकी सेल्फलाइफ बहुत ही कम होती है। यह थाईलैंड की कुंभकाट नींबू की मूल प्रजाति है। यह फल पेड़ पर तीन महीने और तोड़ने के बाद 15 दिन दिन तक सुरक्षित रहता है। दिल्ली की आजादपुर मंडी में इसका रेट 120 से 150 रुपये प्रति किलो है। किसान इसकी खेती से ढाई वर्ष बाद एक एकड़ (450-500 पौधे लगाकर) में सालाना 18-20 लाख रुपये शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं। संवाद

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घर में उगाइए और डेढ़ साल में लीजिए विदेशी आमों का मजा
किसान मेले में कोलकाता की शबनम नर्सरी के स्टाॅल पर आस्ट्रेलिया के एप्पल आम, थाईलैंड के चियांग माई, क्यू जाई, बारामासी मीठा, बनाना, ब्रूनेई किंग, किंग ऑफ चकापात व नाम डाक माई, जापान के मियाजाकी, फ्लोरिडा के 3-टेस्ट, अमेरिका के अमेरिकन रेड पल्मर और आस्ट्रेलिया के ब्लैक स्टोन कस्तूरी के पौधे उपलब्ध हैं। स्टाॅल स्वामी आयन मंडल ने बताया कि यह सभी आम लंगड़ा, दशहरी व अन्य प्रजातियों की तुलना में अधिक मीठे हैं। इनके पौधे डेढ़ साल में ही फल देने लगते हैं, जबकि इनका मेच्योरिटी समय ढाई साल है। भारत के मौसम अनुकूल इनकी फसल में कोई गैप नहीं होता और हर साल उत्पादन देते हैं। 

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