{"_id":"6251ded0f8cad968d9413dbb","slug":"cultural-programme-kashipur-news-hld458986894","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो साल बाद मां बाल सुंदरी के जयकारों से गूंजा काशीपुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो साल बाद मां बाल सुंदरी के जयकारों से गूंजा काशीपुर
विज्ञापन
काशीपुर के मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में पहुंचा मां भगवती का डोला। संवाद
- फोटो : KASHIPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशीपुर। चैती मेला परिसर स्थित मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में शुक्रवार की अर्द्धरात्रि मां बाल सुंदरी देवी का डोला ढोल-नगाड़ों, गाजे-बाजे और भारी सुरक्षा बल व श्रद्धालुओं के साथ पहुंच गया। इस दौरान काशीपुर मां बाल सुंदरी देवी के जयकारों से गूंज उठा। वहीं, मंदिर में डोला पहुंचते ही श्रद्धालु अपनी आराध्य देवी के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने में हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। मां भगवती का डोला अब 14 अप्रैल की अर्द्धरात्रि मंदिर से पंडा आवास वापस जाएगा।
चैत्र मास में लगने वाला ऐतिहासिक चैती मेला बीते दो वर्षों तक कोरोना संक्रमण के चलते नहीं लग पाया। केवल परंपराओं का निर्वहन करते हुए मां का डोला मंदिर भवन पहुंचा था और वहां से वापस पंडा आवास पहुंचा था। इस वर्ष चैत्र में कोरोना संक्रमण थमने पर मां बाल सुंदरी देवी का डोला पूर्व की भांति बड़े ही धूमधाम, हर्षोल्लास और धार्मिक आस्था के साथ निकाला गया।
शुक्रवार को मोहल्ला कानूनगोयान स्थित पंडा आवास पर मां बाल सुंदरी देवी को शाम चार बजे से श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विराजमान किया गया था। इसके बाद रात लगभग 12 बजे से पंडित दयाशंकर जोशी की ओर से डोले को चैती मंदिर ले जाने से पहले धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया। इसके बाद रात लगभग तीन बजे मां बाल सुंदरी देवी के जयकारों के साथ मां बाल सुंदरी देवी की मूर्ति को चैती मंदिर के मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री गोद में लेकर डोले में बैठे। इस दौरान मां भगवती के डोले की सुरक्षा के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात रहा। हजारों की संख्या में श्रद्धालु पैदल और बाइकों से डोले के साथ बैंडबाजों व ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते हुए सुबह लगभग साढ़े चार बजे चैती मंदिर पहुंचे।
विज्ञापन
उधर, चैती मंदिर परिसर में मां बाल सुंदरी देवी का डोला पहुंचते ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। इस दौरान डोले को सुरक्षित मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचाने में सुरक्षा कर्मियों को खासी मशक्कत के साथ हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। चैती मंदिर में मां बाल सुंदरी देवी का डोला पहुंचने पर धार्मिक अनुष्ठान के बाद मां भगवती की मूर्ति को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया गया। इसके बाद मां भगवती की आरती कर श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में मत्था टेका और प्रसाद चढ़ाकर घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं, मंदिर के मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री ने बताया कि मां भगवती का डोला अब 14-15 अप्रैल को त्रयोदशी और चतुर्दशी की अर्द्धरात्रि को विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर वापस नगर के मोहल्ला कानूनगोयान स्थित पंडा आवास पहुंचेगा।
भीषण गर्मी नहीं डिगा सकी आस्था
काशीपुर। मां बाल सुंदरी देवी के प्रति शहर के अलावा अन्य राज्यों के लोगों की गहरी आस्था है। बुक्सा समाज समेत कई अन्य राज्यों के लोग मां बाल सुंदरी देवी को अपनी कुलदेवी मानते हैं। यही वजह है कि चैत्र की भीषण गर्मी में भी दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने घंटों इंतजार कर अपनी आराध्य देवी के दर्शन किए और प्रसाद चढ़ाकर मत्था टेका। पुलिस-प्रशासन ने इस बार मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में जाने के लिए मोटेश्वर महादेव मंदिर की ओर बने पक्के टिनशेड को कवर्ड किया है। इस टिनशेड के अंदर घुमावदार बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचाया जा रहा है।
विज्ञापन
चैत्र मास में लगने वाला ऐतिहासिक चैती मेला बीते दो वर्षों तक कोरोना संक्रमण के चलते नहीं लग पाया। केवल परंपराओं का निर्वहन करते हुए मां का डोला मंदिर भवन पहुंचा था और वहां से वापस पंडा आवास पहुंचा था। इस वर्ष चैत्र में कोरोना संक्रमण थमने पर मां बाल सुंदरी देवी का डोला पूर्व की भांति बड़े ही धूमधाम, हर्षोल्लास और धार्मिक आस्था के साथ निकाला गया।
विज्ञापन
शुक्रवार को मोहल्ला कानूनगोयान स्थित पंडा आवास पर मां बाल सुंदरी देवी को शाम चार बजे से श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विराजमान किया गया था। इसके बाद रात लगभग 12 बजे से पंडित दयाशंकर जोशी की ओर से डोले को चैती मंदिर ले जाने से पहले धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया। इसके बाद रात लगभग तीन बजे मां बाल सुंदरी देवी के जयकारों के साथ मां बाल सुंदरी देवी की मूर्ति को चैती मंदिर के मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री गोद में लेकर डोले में बैठे। इस दौरान मां भगवती के डोले की सुरक्षा के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात रहा। हजारों की संख्या में श्रद्धालु पैदल और बाइकों से डोले के साथ बैंडबाजों व ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते हुए सुबह लगभग साढ़े चार बजे चैती मंदिर पहुंचे।
विज्ञापन
उधर, चैती मंदिर परिसर में मां बाल सुंदरी देवी का डोला पहुंचते ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। इस दौरान डोले को सुरक्षित मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचाने में सुरक्षा कर्मियों को खासी मशक्कत के साथ हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। चैती मंदिर में मां बाल सुंदरी देवी का डोला पहुंचने पर धार्मिक अनुष्ठान के बाद मां भगवती की मूर्ति को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया गया। इसके बाद मां भगवती की आरती कर श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में मत्था टेका और प्रसाद चढ़ाकर घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं, मंदिर के मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री ने बताया कि मां भगवती का डोला अब 14-15 अप्रैल को त्रयोदशी और चतुर्दशी की अर्द्धरात्रि को विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर वापस नगर के मोहल्ला कानूनगोयान स्थित पंडा आवास पहुंचेगा।
भीषण गर्मी नहीं डिगा सकी आस्था
काशीपुर। मां बाल सुंदरी देवी के प्रति शहर के अलावा अन्य राज्यों के लोगों की गहरी आस्था है। बुक्सा समाज समेत कई अन्य राज्यों के लोग मां बाल सुंदरी देवी को अपनी कुलदेवी मानते हैं। यही वजह है कि चैत्र की भीषण गर्मी में भी दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने घंटों इंतजार कर अपनी आराध्य देवी के दर्शन किए और प्रसाद चढ़ाकर मत्था टेका। पुलिस-प्रशासन ने इस बार मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में जाने के लिए मोटेश्वर महादेव मंदिर की ओर बने पक्के टिनशेड को कवर्ड किया है। इस टिनशेड के अंदर घुमावदार बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचाया जा रहा है।