{"_id":"5a2c32494f1c1b95188b8dae","slug":"clothes-will-be-made-from-the-fibers-of-dhencha","type":"story","status":"publish","title_hn":"ढैंचा के रेशों से बन सकेंगे कपड़े ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ढैंचा के रेशों से बन सकेंगे कपड़े
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
Updated Sun, 10 Dec 2017 12:28 AM IST
विज्ञापन
ढैंचा के रेशों से बने कपड़े।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अभी तक आपने कपास, रेशम और सिंथेटिक और जूट के कपड़े सुने होंगे, लेकिन अब ढैंचा के रेशों से भी कपड़े बनाए जा सकेंगे। पंतनगर विश्वविद्यालय में हुए लंबे शोध के बाद इस पर सफलता मिली है। शोध में ढैंचा के कई अन्य लाभ भी सामने आए हैं। यह शोध पंतनगर विवि के गृह विज्ञान महाविद्यालय के वस्त्र एवं परिधान विभाग में पीएचडी की छात्रा मोनिका नेगी ने सह प्राध्यापिका डॉ. अनीता रानी की देखरेख में किया है।
विज्ञापन
मोनिका ने शोध में पाया कि ढैंचा के तने का प्रयोग मोटे, चमकदार तंतु विकसित करने में किया जा सकता है। शोध के तहत ढैंचा से जैविक एवं रासायनिक विधि से तंतु निकाल कर उसकी रासायनिक एवं एंजाइमेटिक क्रियाओं से धुलाई (स्काउरिंग) की गई। इन तंतुओं को औद्योगिक सॉफ्टनर्स (कैटायनिक, नॉन आइनिक एवं सिलिकन) और तेल आधारित इमलशन का उपयोग कर नरम किया गया। इन तंतुओं की मदद से धागों का निर्माण करके हथकरघे पर कपड़ा तैयार किया गया। इनके सीधे तंतुओं से बिना बुने कपड़े का भी निर्माण किया गया।
विज्ञापन
शोध अध्ययन में जैविक निष्कर्षण विधि से प्राप्त तंतु में रासायनिक विधि से प्राप्त तंतु से बेहतर भौतिक गुण पाए गए। खास बात यह है कि मोटे जूट के ताने और ढैंचा के बाने से बने मिश्रित कपड़े में बेहतर गुण, मजबूती एवं लचीलापन पाया गया है। शोध में यह भी पाया गया कि शुद्ध ढैंचा से निर्मित बिना बुने एवं बुने कपड़ों को मौजूदा जूट एवं कॉयर जियो टैक्सटाइल के विकल्प के रूप में काम में लाया जा सकता है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा कटाव भी रोका जा सकता है।
विज्ञापन
कच्ची और पक्की सड़कों के सुदृढ़ीकरण में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। अमूमन ढैंचा का प्रयोग तराई क्षेत्र में फसलों की खेती को लाभ पहुंचाने के लिए हरी खाद के रूप में किया जाता है लेकिन इस खोज से किसान इसके जरिये धन भी कमा सकेंगे। मिट्टी की गुणवत्ता की जांच में यह भी पाया गया है कि ढैंचा के तनों से तंतुओं का निष्कर्षण के लिए प्रयोग करने से उसकी हरी खाद संबंधी उपयोगिता प्रभावित नहीं होती है।
छह साल से जारी था शोध कार्य
ढैंचा से कपड़ा बनाने के लिए शोध कार्य केवल पंतनगर विश्वविद्यालय ने ही किया है। पहले ऐसा शोध होने की कोई सूचना नहीं है। मोनिका नेगी ने एमएससी के दौरान 2011 में ढैंचा पर शोध कार्य शुरू किया था। छह साल की मेहनत के बाद पीएचडी के दौरान 2017 में उसे सार्थक परिणाम मिले। मोनिका ने ढाई महीने के पौधे की छाल पर शोध कार्य किया। उसे इसमें सफलता मिली।
-डॉ.अनीता रानी, मोनिका नेगी की गाइड