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पुरानी पेंशन बहाली समेत 18 सूत्री मांगो के लिए गरजे कर्मचारी
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रुद्रपुर कलक्ट्रेट परिसर में धरना देते कर्मचारी।
- फोटो : RUDRAPUR
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पुरानी पेंशन बहाली समेत 18 सूत्री मांगो को लेकर कर्मचारियों ने कलक्ट्रेट परिसर में धरना प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार को कई बार समस्या से अवगत कराया है। समस्या का समाधान नहीं निकला तो जल्द ही उग्र आंदोलन को बाध्य होना पड़ेगा।
सोमवार को एआरटीओ कार्यालय परिसर के सामने कलक्ट्रेट परिसर में अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के प्रांतीय आह्वान पर कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया। कहा कि राज्य कर्मचारियों के लिए गोल्डन कार्ड की विसंगतियों का निराकरण करते हुए केंद्रीय कर्मचारियों की तरह सीजीएचएस की व्यवस्था प्रदेश में लागू की जाए। प्रदेश व राज्य के बाहर उच्च कोटि के सभी अस्पतालों को अधिकृत किया जाए। पदोन्नति के लिए पात्रता अवधि में पूर्व की भांति शिथि लीकरण की व्यवस्था बहाल की जाए। केंद्र सरकार की भांति प्रदेश के कर्मचारियों को 11 प्रतिशत महंगाई भत्ते की घोषणा शीघ्र की जाए।
प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए। कहा कि जिन विभागों का पुनर्गठन अभी तक शासन स्तर पर लंबित है, उन विभागों का शीघ्र पुनर्गठन किया जाए। सिंचाई विभाग को गैर तकनीकी विभागों के निर्माण कार्य के लिए कार्यदायी संस्था के रूप में स्थाई रूप से अधिकृत कर दिया जाए। वहां मुख्य संयोजक प्रताप कैड़ा, दीप जोशी, मोहन राठौर, चंद्र प्रकाश, शालका पंत, प्रेम सिंह, अनिल कुमार, सत्यजीत सरकार आदि थे।
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सोमवार को एआरटीओ कार्यालय परिसर के सामने कलक्ट्रेट परिसर में अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के प्रांतीय आह्वान पर कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया। कहा कि राज्य कर्मचारियों के लिए गोल्डन कार्ड की विसंगतियों का निराकरण करते हुए केंद्रीय कर्मचारियों की तरह सीजीएचएस की व्यवस्था प्रदेश में लागू की जाए। प्रदेश व राज्य के बाहर उच्च कोटि के सभी अस्पतालों को अधिकृत किया जाए। पदोन्नति के लिए पात्रता अवधि में पूर्व की भांति शिथि लीकरण की व्यवस्था बहाल की जाए। केंद्र सरकार की भांति प्रदेश के कर्मचारियों को 11 प्रतिशत महंगाई भत्ते की घोषणा शीघ्र की जाए।
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प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए। कहा कि जिन विभागों का पुनर्गठन अभी तक शासन स्तर पर लंबित है, उन विभागों का शीघ्र पुनर्गठन किया जाए। सिंचाई विभाग को गैर तकनीकी विभागों के निर्माण कार्य के लिए कार्यदायी संस्था के रूप में स्थाई रूप से अधिकृत कर दिया जाए। वहां मुख्य संयोजक प्रताप कैड़ा, दीप जोशी, मोहन राठौर, चंद्र प्रकाश, शालका पंत, प्रेम सिंह, अनिल कुमार, सत्यजीत सरकार आदि थे।
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