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13 नामजद समेत 100 अज्ञात पर मुकदमा
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Tue, 17 May 2016 12:12 AM IST
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जाम
- फोटो : अमर उजाला
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सचिन के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर परिजनों और लोगों ने जमकर बखेड़ा किया और दो घंटे तक पुलिस की नाक में दम किए रखा। पहले लोगों ने कोतवाली गेट पर शव रखकर सड़क को एक घंटा जाम रखा और फिर शव लेकर एमपी चौक पहुंचकर प्रदर्शन किया।
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गर्मी में जाम में फंसे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। चौक के चारों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रही। कोतवाल ने 24 घंटे में आरोपियों को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया, तब जाकर लोगों का आक्रोश शांत हुआ और जाम खोला गया।
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सोमवार को पोस्टमार्टम होने के बाद परिजनों और बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने शव के साथ कोतवाली तक जुलूस निकाला। उन्होंने हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर शव को कोतवाली के बाहर मुख्य मार्ग पर रखकर जाम कर दिया। महिलाओं ने कोतवाली घेरी और दबाव में हत्यारों को गिरफ्तार नहीं करने का आरोप लगाकर खूब हंगामा काटा।
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करीब एक घंटे मार्ग को जाम करने के बाद लोगों ने शव को उठाया और एमपी चौक में रखकर प्रदर्शन किया। उन्होंनेे मानव श्रृंखला बना कर एनएच रामनगर, एनएच रुद्रपुर, मुरादाबाद और मुख्य बाजार मार्ग को जाम कर दिया। कड़ी धूप में भी महिलाएं डटी रही और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करती रही। जाम में फंसी बस, कार के यात्रियों को दिक्कतें उठानी पड़ी।
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कर्मियों की अपील का कोई फर्क नहीं पड़ा। बाद में कोतवाल वीके जेठा ने 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद लोग शव उठाकर ले गए और तय समय में गिरफ्तारी नहीं होने पर फिर सड़क जाम करने की चेतावनी भी दे गए।
अस्पताल में मजदूरी करता था मृतक
मृतक सचिन कश्यप का पूरा परिवार फैक्ट्रियों मेें काम करता है। घर में पिता राम स्वरुप, माता बीना देवी, भाई राहुल कश्यप, संजय के अलावा तीन विवाहित बहन हैं। सचिन अल्ली खां मोहल्ले में एक नर्सिंग होम में कम्पाउंर था।
कई बार गश खाकर गिरी सचिन की मां
सचिन की मौत के बाद से ही परिजनों के साथ ही मां बीना देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। पोस्टमार्टम हाउस में भी कई बार रोते हुए वह गश खाकर गिर पड़ी। वह बार-बार रोते बिलखते हुए कह रही थी कि मेरे सचिन को कहां छोड़ आए। उसे तो उसके दोस्त घर से बुलाकर ले गए थे।
कई युवाओं ने थामे थे पत्थर
एमपी चौक में जाम लगाने में शामिल कई युवक हाथ में पत्थर लिए हुए थे। पुलिस के आने से पहले तक वे लोग गाडिय़ां रोककर चालकों को पत्थर मारकर शीशे तोड़ने की धमकी भी दे रहे थे। लेकिन जैसे ही पुलिस फोर्स पहुंची तो युवकों ने डरकर पत्थर इधर-उधर फेंक दिए और नारेबाजी करने वालों में शामिल हो गए।
नवजात को थामे नर्स को जाने दिया
एमपी चौक में जाम के दौरान एक बाइक में व्यक्ति के साथ पीछे नवजात को थामे एक निजी अस्पताल की नर्स बैठी थी। लोगों ने बाइक रोकी तो व्यक्ति ने कहा कि बच्चे को तकलीफ है, इसलिए जांच कराने जा रहे हैं। पीछे-पीछे बच्चे के अन्य परिजन भी पहुंच गए। जिसके बाद बाइक सवार को मुरादाबाद की तरफ निकलने का रास्ता दे दिया गया।
हेमपुर डिपो के कमांडेंट की जिप्सी रोकी
प्रदर्शनकारियों ने चौक के चारों रास्तों में आवाजाही को ठप कर दिया था। इसी बीच हेमपुर डिपो के कमांडेंट की जिप्सी जाम में फंस गई। जैसे ही चालक ने गाड़ी आगे बढ़ाई तो लोगों ने घेर लिया। चालक ने लोगों से कहा कि वह फौजी हैं और उनकी कोई गलती नहीं है। लिहाजा उन्हें वहां से जाने दिया जाए। करीब दस मिनट रोके रखने के बाद आंदोलनकारियों ने जिप्सी को उल्टा लौटा दिया।
शव की वजह से पुलिस ने नहीं किया बल प्रयोग
कोतवाली गेट पर एक घंटा सड़क जाम करने के बाद प्रदर्शनकारियों ने शव को एमपी चौक में रखकर जाम कर दिया था। पुलिस को एमपी चौक जाम करने की जानकारी थी, लेकिन भीड़ के आगे पुलिस लाचार दिखी। एमपी चौक में भी पुलिस प्रदर्शनकारियों को जाम खोलने देने के लिए मनाती रही। पुलिस के सामने दिक्कत यह थी कि प्रदर्शनकारी शव के साथ थे। अगर पुलिस बल प्रयोग करती तो स्थिति बिगड़ सकती थी। इसलिए पुलिस को भीड़ को मनाने में एक घंटे का समय लग गया। जो जाम में फंसे लोगों के लिए बेहद भारी रहा।