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भारी विरोध के बाद अतिक्रमण तोड़ने पहुंची टीम बैरंग लौटी

Sat, 20 Feb 2016 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/ दिनेशपुर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/ दिनेशपुर। Updated Sat, 20 Feb 2016 12:17 AM IST
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Beating the team returned after protests reached breaking encroachment

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 हाईकोर्ट के आदेश के बाद विवादित भूमि से कब्जा हटाने पहुंची प्रशासन की टीम को कांग्रेसियों और जनविरोध का सामना करना पड़ा। भारी विरोध के देखते हुए विवादित भूमि से कब्जा हटाने आई तहसील व पुलिस प्रशासन को कांग्रेसी नेताओं के साथ भारी जनविरोध का सामना करना पड़ा। जिसे देख प्रशासन की टीम बिना अतिक्रमण हटाए बैंरग लौट आई।
मदनापुर ग्राम सभा के गांव खटोला में एक बीघा जमीन को लेकर लेखराज कुकरेती व दूसरे पक्ष के कानु मंडल, मनोज मंडल, अमल मंडल, सुनील मंडल के बीच कई वर्षों से विवाद चल रहा है। लेखराज ने राजस्व अभिलेखों में विवादित भूखंड उनके नाम दर्ज होने की बात करते हुए बीते दिनों हाईकोर्ट नैनीताल में डीएम, एसडीएम, व तहसीलदार गदरपुर के खिलाफ वाद दायर कर उसके नाम की जमीन पर कब्जा नहीं दिलाने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने बीते 8 जनवरी 2016 को गदरपुर के एसडीएम को 6 सप्ताह के भीतर मामले को निपटाने के निर्देश दिए थे। जिस पर तहसीलदार खेमसिंह बिष्ट शुक्रवार को तहसील कर्मियों व भारी संख्या में पुलिस बल को लेकर विवादित स्थल पर पहुंचे। मगर कार्रवाई के विरोध में मौके पर पहले से ही कांग्रेस श्रम विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रेमानंद महाजन, वरिष्ठ कांग्रेसी त्रिनाथ विश्वास, तारक बाछाड़, मृणाल सरदार, सुभाष सरकार, प्रशांत मालाकार, किशोर विश्वास कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सैकड़ों लोगों के साथ मौजूद थे। मौके पर सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेताओं के साथ भारी जनबल देख तहसील और पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। कब्जा हटाना तो दूर प्रशासन की टीम मौके पर जाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाई। सूचना पर एसडीएम तीरथपाल सिंह तत्काल मौके पर पहुंचे। जिस पर कांग्रेस नेताओं ने उन्हें घेर लिया। कांग्रेसियों का कहना था कि राजस्व कर्मियों से मिलीभगत कर वर्षों से बसे गरीब परिवारों को उजाड़ने का प्रयास हो रहा है। मौके की नजाकत को देख एसडीएम ने पुलिस और तहसील कर्मियों को वापस जाने के निर्देश दिए।

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26 साल से रह रहे हैं यहां
 खटोला गांव में विवादित एक बीघा जमीन पर बसे कानु मंडल आदि का कहना है कि इस भूखंड पर वह लोग पिछले 26 वर्ष से निवास कर रहे हैं। उक्त भूमि छेदा सिंह ने उन्हें दान में दी थी। उनका आरोप है कि लेखराज के पिता अनसुइया ने 12 साल पहले राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से हेराफेरी कर खेत और खसरा नंबर बदल दिया और उनकी जमीन को अपने नाम कर लिया। जिसका वाद हाईकोर्ट में चल रहा है। उधर लेखराज का कहना है कि उसके पिता ने 1998 में तुर्सी सिंह की तीन बीघा जमीन को सरकार से नीलामी में खरीदा था। उस दौरान उन्हें पूर्ण कब्जा नहीं दिया गया था। विवादित जगह राजस्व अभिलेखों में आज भी उसके नाम दर्ज है। 
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