काशीपुर। परंपरागत होली गायन को आगे बढ़ाने के लिए काशीपुर के होल्यार बसंत बल्लभ बिष्ट 36 साल से बैठकी होली में तबले पर संगत दे रहे हैं। 10 साल की उम्र से बसंत ने तबला वादन शुरू कर दिया था। संगीत में रूची होने के कारण बसंत ने प्रयागराज संगीत समिति इलाहाबाद से गायन और वादन में संगीत प्रभाकर की डिग्री भी ली है।
काशीपुुर की वैशाली कॉलोनी में रहने वाले बसंत का पैतृक गांव गरसाड़ी, देवीधुरा चंपावत है। बसंत के पिता प्रेमबल्लभ बिष्ट संगीत शिक्षक रहे हैं। उनसे प्रेरित होकर बसंत ने संगीत में शिक्षा का मन मनाया। प्रारंभिक शिक्षा स्व. टीकाराम गहतोड़ी के सानिध्य में ली। कुमाऊं के प्रसिद्ध संगीतज्ञ चतुर सिंह मौनी के संपर्क में आने के बाद उनका रुझान बैठकी होली गायन, वादन की तरफ हुआ। बसंत तीन दशक से काशीपुर के साथ ही रानीखेत, बग्वालीपोखर, खटीमा, नैनीताल, हल्द्वानी और रुद्रपुर में बैठकी होली गायन और वादन के लिए जाते हैं। इसके साथ ही वह रामलीला में श्री राम, भरत और शत्रुघ्न का किरदार निभाते आये हैं। बैठकी होली में वादन के लिए वह दीपचंदी, जतताल, दादरा, रूपक और तीन ताल पर संगत देते हैं। उनके छोटे भाई और बहन ने भी संगीत की शिक्षा ग्रहण की है। उन्होेंने बताया कि करीब दस साल पहले काशीपुर में 50 से 60 घरों में बैठकी होली होती थी। अब लोगों में रुझान न होने के कारण यह मात्र 15 घरों तक सिमट गई है। वह कहते हैं कि प्रचार-प्रसार के अभाव में यह परंपरा लुप्त हो जाएगी।