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किसानों को दी निर्यात योग्य बांसमती धान की जानकारी
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किसानों को बांसमती धान का उत्पादन बढ़ाने को लेकर जानकारी दी गई।
- फोटो : KASHIPUR
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कृषि एवं पसंस्कृत खाद्य उत्पादन एवं निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बासमती धान उत्पादक किसानों को निर्यात की जानकारी दी। इस दौरान गुणवत्तायुक्त बासमती धान का उत्पादन करने बारे में बताया। वैज्ञानिकों ने रसायन की जगह जैविक खाद और दवाओं के उपयोग की सलाह दी।
बुधवार को केवीके सभागार में निदेशक प्रसार शिक्षा पंतनगर कृषि विवि डॉ. अनिल कुमार शर्मा की अध्यक्षता में बासमती धान उत्पादन और निर्यात पर गोष्ठी हुई। संचालन केवीके प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने किया। गोष्ठी में बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। केवीके प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने कहा कि पूरे विश्व में भारत का बासमती चावल निर्यात 44.6 मिलियन टन है जो लगभग 3200 करोड़ रुपये होता है।
एपीडा बासमती धान के उत्पादन और निर्यात संबंधित कार्यों को देखती है। देश के हरियाणा, पंजाब, यूपी, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर के 95 जिलों में बासमती धान का उत्पादन होता है। इन जिलों से बासमती अमेरिका, ब्रिटेन, बेल्जियम, कतर, इटली में निर्यात किया जाता है। इन देशों के मानक काफी कड़े हैं। जांच में कैमिकल की जरा से मात्रा पाए जाने पर आर्डर रद्द हो जाता है इसलिए एपीडा बांसमती की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक करती है। गोष्ठी में एपीडा मेरठ के वैज्ञानिक नेत्रपाल शर्मा ने किसानों को धान की फसल में गुणवत्ता बढ़ाने का आह्वान किया।
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सरदार विश्वविद्यालय मेरठ के वैज्ञानिक राजेंद्र सिंह ने किसानों को बासमती धान की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रसायन दवाओं की जगह नीम से बनी दवाओं का उपयोग करने की सलाह दी। इसी दौरान बाजपुर के किसान सुखदेव सिंह ने किसानों को धान की सीधी बुवाई करने की सलाह दी। गोष्ठी में प्रगतिशील किसान सुरजीत डाबर, एसएस बाजवा, अरुण बक्कू, अरुण शर्मा आदि थे। (संवाद)
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बुधवार को केवीके सभागार में निदेशक प्रसार शिक्षा पंतनगर कृषि विवि डॉ. अनिल कुमार शर्मा की अध्यक्षता में बासमती धान उत्पादन और निर्यात पर गोष्ठी हुई। संचालन केवीके प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने किया। गोष्ठी में बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। केवीके प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने कहा कि पूरे विश्व में भारत का बासमती चावल निर्यात 44.6 मिलियन टन है जो लगभग 3200 करोड़ रुपये होता है।
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एपीडा बासमती धान के उत्पादन और निर्यात संबंधित कार्यों को देखती है। देश के हरियाणा, पंजाब, यूपी, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर के 95 जिलों में बासमती धान का उत्पादन होता है। इन जिलों से बासमती अमेरिका, ब्रिटेन, बेल्जियम, कतर, इटली में निर्यात किया जाता है। इन देशों के मानक काफी कड़े हैं। जांच में कैमिकल की जरा से मात्रा पाए जाने पर आर्डर रद्द हो जाता है इसलिए एपीडा बांसमती की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक करती है। गोष्ठी में एपीडा मेरठ के वैज्ञानिक नेत्रपाल शर्मा ने किसानों को धान की फसल में गुणवत्ता बढ़ाने का आह्वान किया।
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सरदार विश्वविद्यालय मेरठ के वैज्ञानिक राजेंद्र सिंह ने किसानों को बासमती धान की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रसायन दवाओं की जगह नीम से बनी दवाओं का उपयोग करने की सलाह दी। इसी दौरान बाजपुर के किसान सुखदेव सिंह ने किसानों को धान की सीधी बुवाई करने की सलाह दी। गोष्ठी में प्रगतिशील किसान सुरजीत डाबर, एसएस बाजवा, अरुण बक्कू, अरुण शर्मा आदि थे। (संवाद)