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कम से कम 400 रुपये हो गन्ने का प्रति क्विंटल मूल्य
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खेत में खड़े गन्ने का प्रतिकात्मक चित्र।
- फोटो : KASHIPUR
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किसान गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग उठाने लगे हैं। उनका कहना है कि पांच साल में गन्ने का मूल्य सिर्फ 37 रुपये बढ़ा है, जबकि जबकि लागत बहुत बढ़ गई है। किसानों की मांग है कि गन्ने का मूल्य कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए ताकि किसानों की लागत निकल सके।
सरकार ने अभी तक इस सत्र का गन्ना खरीद मूल्य घोषित नहीं किया है, जबकि पड़ोसी राज्य यूपी 25 रुपये बढ़ाकर घोषित कर चुका है। यूपी में गन्ने का रेट प्रति क्विंटल 350 रुपये कर दिया गया है। प्रदेश के किसान भी गन्ने का मूल्य बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि डीजल, खाद ,लेबर, ट्रैक्टर, उपभोक्ता सामान का भाव काफी बढ़ गया है, जिससे गन्ने का लागत मूल्य भी बढ़ गया है।
बाजार महंगाई के अनुसार ही गन्ने का मूल्य तय होना चाहिए। कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल का रेट दिया जाना चाहिए। इससे कम में किसान का परता नहीं आता है। अगर सही मूल्य नहीं मिलता है तो किसान अन्य विकल्पों पर विचार करेगा। - जितेंद्र सिंह जीतू, अध्यक्ष उत्तराखंड किसान यूनियन (युवा)
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सरकार लागत मूल्य से कम गन्ना खरीद मूल्य रखती है। सरकार को गन्ने का मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल रखना चाहिए। इससे कम पर किसान को घाटा होगा। यह किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा।
-सुरेश शर्मा, प्रगतिशील किसान।
सरकार को गन्ने का मूल्य 450 रुपये रखना चाहिए। खाद, बीज, डीजल व खेती के काम आने वाले उपकरणों के दाम, मजदूरी बढ़ गई है, जिससे गन्ने का उत्पादन मूल्य भी बढ़ गया है। अब गन्ने की फसल उगाने में काफी कीमत लगानी पड़ती है।
-मनप्रीत सिंह, प्रदेश प्रवक्ता भाकियू युवा।
स्वामी नाथन की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि फसल की लागत मूल्य और किसान की मेहनत के अनुसार ही फसल का भाव तय किया जाना चाहिए। गन्ने का लागत मूल्य लगभग 400 रुपये होना चाहिए। -जोरावर सिंह, प्रगतिशील किसान
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सरकार ने अभी तक इस सत्र का गन्ना खरीद मूल्य घोषित नहीं किया है, जबकि पड़ोसी राज्य यूपी 25 रुपये बढ़ाकर घोषित कर चुका है। यूपी में गन्ने का रेट प्रति क्विंटल 350 रुपये कर दिया गया है। प्रदेश के किसान भी गन्ने का मूल्य बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि डीजल, खाद ,लेबर, ट्रैक्टर, उपभोक्ता सामान का भाव काफी बढ़ गया है, जिससे गन्ने का लागत मूल्य भी बढ़ गया है।
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बाजार महंगाई के अनुसार ही गन्ने का मूल्य तय होना चाहिए। कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल का रेट दिया जाना चाहिए। इससे कम में किसान का परता नहीं आता है। अगर सही मूल्य नहीं मिलता है तो किसान अन्य विकल्पों पर विचार करेगा। - जितेंद्र सिंह जीतू, अध्यक्ष उत्तराखंड किसान यूनियन (युवा)
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सरकार लागत मूल्य से कम गन्ना खरीद मूल्य रखती है। सरकार को गन्ने का मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल रखना चाहिए। इससे कम पर किसान को घाटा होगा। यह किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा।
-सुरेश शर्मा, प्रगतिशील किसान।
सरकार को गन्ने का मूल्य 450 रुपये रखना चाहिए। खाद, बीज, डीजल व खेती के काम आने वाले उपकरणों के दाम, मजदूरी बढ़ गई है, जिससे गन्ने का उत्पादन मूल्य भी बढ़ गया है। अब गन्ने की फसल उगाने में काफी कीमत लगानी पड़ती है।
-मनप्रीत सिंह, प्रदेश प्रवक्ता भाकियू युवा।
स्वामी नाथन की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि फसल की लागत मूल्य और किसान की मेहनत के अनुसार ही फसल का भाव तय किया जाना चाहिए। गन्ने का लागत मूल्य लगभग 400 रुपये होना चाहिए। -जोरावर सिंह, प्रगतिशील किसान

जितेंद्र सिंह जीतू।- फोटो : KASHIPUR

जोरावर सिंह।- फोटो : KASHIPUR

सुरेश शर्मा।- फोटो : KASHIPUR

मनप्रीत सिंह।- फोटो : KASHIPUR