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यहां खोखला निकला ढाई हजार टन सोने का दावा
प्रवेश कुमारी/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 18 Oct 2013 04:00 PM IST
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हजारों टन सोना देश की किस्मत बदलने के लिए काफी है। उन्नाव के एक किले में बड़ी मात्रा में सोने का दावा करने वाले ‘स्वप्न’ संत शोभन सरकार के दावे पर इसीलिए हर किसी के आंख-कान लगे हैं, लेकिन वह तो केवल सपना ठहरा, बात अपने उत्तराखंड की करें तो यहां एसेसमेंट सर्वे में सोने का दावा किए जाने के बावजूद पीली धातु की अपेक्षित चमक देखने को नहीं मिली।
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ढाई हजार टन सोने का आंकलन
दावा भी कम नहीं, तकरीबन ढाई हजार टन सोने का। यह आंकलन खुद उस कंपनी का था, जिसने इस क्षेत्र को माइनिंग के लिए लीज पर लिया था।
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वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार के अनुसार कंपनी के सीईओ ने भी बीच ही में काम छोड़ दिया था। इसी बीच वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से भी प्रोजेक्ट पर अड़ंगा लगा।
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फंडिंग से हाथ खींच लिए
आखिरकार कनाडा की पीबल क्रीक, जिसकी सब्सिडियरी कंपनी आदि गोल्ड माइंस थी, ने फंडिंग से हाथ खींच लिए। इसी साल जनवरी माह में यहां काम बंद हो गया।
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अलबत्ता, वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक सोने की इस क्षेत्र में बड़ी स्थिति को स्वीकारते हैं। संस्थान के डॉ. राजेश कुमार के अनुसार यह क्षेत्र धातुओं से भरपूर है। माइनिंग लेवल पर कई सैंपल्स में खासे सोने की पुष्टि हुई है।
कुछ यूं था मिनरल रिसोर्स एस्टिमेट
अस्कोट का जो मिनरल रिसोर्स एस्टिमेट तैयार हुआ था, वह टोरंटो और कोलकाता के विशेषज्ञों ने तैयार किया था। इस एस्टिमेट में 1.86 मिलियन टन रिसोर्स की बात कही गई है। प्रति टन तांबा, जस्ता, लैड, सिल्वर और गोल्ड की प्रतिशत आंकी गई है।
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2006 में शुरू किया था ड्रिल
पीबल क्रीक ने 2006 में ड्रिल शुरू किया था। दो चरणों में यह कार्यक्रम 07 में संपन्न हुआ। 74 होल में 13900 मीटर तक खुदाई हुई। बड़ी मात्रा में धातु की प्राप्ति भी हुई पर सोना ज्यादा नहीं मिला। इससे पहले यूएनडीपी प्रोग्राम और अन्य सरकारी एजेंसियों के जरिए 1965-88 के बीच कई बार क्षेत्र में ड्रिल हुआ था।
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गौचर, थलीसैण में भी रिपोर्टेड
अस्कोट में भले ही काम आगे नहीं बढ़ रहा, लेकिन गढ़वाल में चमोली जिले के गौचर और थलीसैण ब्लाक में भी गोल्ड रिपोर्ट हुआ है। यह अलग बात है कि इस क्षेत्र में काम आगे नहीं बढ़ा है।