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परी को गोद लेने पहुंचे 20 दंपति, सीएम बोले 'नहीं देंगे'
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jun 2013 01:42 AM IST
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न उसे मम्मी-पापा का पता और न ही उनके खोने का अहसास। गुब्बारे, खिलौनों से खेलते दून अस्पताल में जब नर्सें परी को पुचकारती हैं, तो खुशी से वह चहक उठती है।
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लेकिन हर बार अलग-अलग लोगों को देख उसके चेहरे में थोड़ा डर भी दिखने लगता है। जलप्रलय में माता-पिता से दूर हुई नन्ही परी को ममता की छांव देने के लिए 20 दंपति आगे आए हैं, लेकिन चाइल्ड हेल्प लाइन ने बच्चों को सौंपने से इनकार कर दिया है।
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दून अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में करीब तीन साल की ‘परी’ (काल्पनिक नाम) के दोनों पैरों में प्लास्टर देखकर हर कोई अचरज में रह जाता है। केदारनाथ घाटी में आई आपदा में बचाई गई इस मासूम के न तो माता-पिता का पता चल सका है और न ही किसी रिश्तेदार का।
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इसलिए पुलिस ने पीड़ित की जिम्मेदारी चाइल्ड हेल्प लाइन को सौंप दी, जिसे सोमवार को दून अस्पताल में लाया गया। अस्पताल में आने के बाद हर कोई बच्ची के लिए खिलौने, कपड़े लेकर आ रहा है। कई दंपति मासूम को गोद लेने के लिए पूछ रहे हैं।
परी की देखरेख कर रही चाइल्ड हेल्प लाइन की नेहा शर्मा ने बताया कि अभी तक 20 लोग अस्पताल पहुंचकर बच्ची को गोद लेने की बात कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि लखनऊ से भी बच्ची को गोद लेने के लिए लोग आ रहे हैं। मगर अभी किसी को भी इसकी जिम्मेदारी नहीं सौंपी जा रही है।
आपदा पीड़ित किसी बच्चे को गोद नहीं देंगे: सीएम
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि आपदा पीड़ित किसी भी बच्चे को गोद नहीं दिया जाएगा। पहले बच्चे के मां-बाप और परिजनों को खोजा जाएगा। छह महीने तक परिजनों की तलाश होगी। अगर किसी बच्चे के घरवाले नहीं मिलते हैं तो डीएम और एसपी मिलकर उसके संबंध में निर्णय लेंगे।
मुख्यमंत्री बहुगुणा शुक्रवार शाम दून अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती तीन साल की बच्ची परी को देखने पहुंचे थे। पहाड़ों पर आई आपदा में बच्ची के मां-बाप खो गए थे। बच्ची मम्मी-पापा के अलावा कुछ नहीं बोल पाती है। बच्ची को किसी संस्था या व्यक्ति को गोद दिए जाने की बात से उन्होंने साफ इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि आपदा में जिन बच्चों के परिजन खोए हैं, उनके खाने-पीने, इलाज और रहने का इंतजाम सरकार करेगी। बहुगुणा ने जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम को निर्देशित किया कि बच्ची की फोटो नार्दर्न इंडिया के सभी डीएम को भेजें। बच्ची की फोटो मीडिया में दें, जिससे उसके घरवाले मिल जाएं।
ऐसे बच्चों का फोटो वेबसाइट पर डालने के भी उन्होंने निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने ट्रॉमा सेंटर में भर्ती रोगी कुलदीप, अशरफ अली, सचिन पाल, गजेंद्र गिरि से भी खैरियत पूछी।