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दागी अफसर पर उत्तराखंड सरकार मेहरबान
अमर उजाला, अजित सिंह राठी, देहरादून
Updated Wed, 11 Sep 2013 09:09 AM IST
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एक दागी अफसर पर उत्तराखंड सरकार कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो रही है। सर्विस रिकॉर्ड में कई प्रतिकूल प्रविष्टियों, स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद कुछ वर्ष पूर्व निकाले गए एक अफसर को फिर उसी विभाग में तैनाती दे दी गई है, जहां से उन्हें दागी घोषित करने के बाद रुखसत किया गया था।
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एक दागी अफसर पर राज्य सरकार की ‘मेहरबानी’ कई सवाल खड़े कर रही है। सवाल ये है कि करीब पांच वर्ष में ही एक दागी अफसर के सभी दाग कैसे ‘धुल’ गए और उसे फिर से तैनाती क्यों दी गई।
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यह मामला उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में मुख्य पर्यावरण अधिकारी के पद पर तैनात रह चुके टीबी सिंह का है। टीबी सिंह की तैनाती इन दिनों हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में है।
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में मुख्य पर्यावरण अधिकारी के पद पर तैनाती के दौरान टीबी सिंह पर कई दाग लगे। तमाम विवादों के बाद उनकी रुखसती (वर्ष 2008 में) तो हुई लेकिन करीब पांच साल बाद मंगलवार को शासन ने उन्हें एक साल के लिए डेपुटेशन पर बुलाने के आदेश जारी कर दिए।
खास बात ये भी है कि यह अधिकार सरकार ने बोर्ड को दिया है और बोर्ड ने जरूरत के लिए कोई विज्ञापन भी प्रकाशित नहीं किया। अपर सचिव वन मनोज चंद्रन ने टीबी सिंह को बोर्ड में सीईओ नियुक्त करने के आदेश चेयरमैन एस रामास्वामी को जारी कर दिए।
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आदेश की प्रति प्राप्त होने की पुष्टि बोर्ड के सदस्य सचिव विनोद सिंघल ने भी की है। यह इस विवादित अफसर का दूसरा प्रयास था। इससे पहले भी वह कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश की चिट्ठी के दम पर फाइल चालू करा चुके थे। आठ दिसंबर 2012 में सुरेंद्र राकेश ने टीबी सिंह के लिए सीएम को चिट्ठी लिखकर सिफारिश की थी।
इसी बीच ‘अमर उजाला’ ने भंडाफोड़ किया तो प्रक्रिया रुक गई थी। इसके बाद भी टीबी सिंह ने हार नहीं मानी और कांग्रेस के एक असरदार महासचिव के पत्र के दम पर नियुक्ति करा ली।
अजब इत्तफाक
मौजूदा मुख्य सचिव ने बतौर प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री (आठ जून 2007 को) तत्कालीन प्रमुख सचिव वन एन रविशंकर को भेजी चिट्ठी में कहा था कि वन मंत्री ने बोर्ड के सीईओ टीबी सिंह की अनियमितताओं, कदाचार, अनुशासनहीनता साबित करने वाले कागजात दिए हैं।
इसलिए इनकी जांच कराए और इन्हें तत्काल मूल राज्य हिमाचल भिजवाने की व्यवस्था करें। आज सुभाष कुमार मुख्य सचिव हैं और टीबी सिंह वापस आ गए।
सर्विस रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी
15.03.2007 को कोरस इंडिया लि. की पत्रावली में अनियमितता करने और अधिकारियों को गुमराह करने पर प्रतिकूल प्रविष्टी मिली
15.03.2007 को बाजपुर की एक पेपर मिल और अमन मैटल फिनीशर्स हरिद्वार के मामले में स्पष्टीकरण जारी हुआ
11.12.2009 को बोर्ड के सदस्य सचिव अजय गैरोला ने सचिव को पत्र भेजकर टीबी सिंह की कारगुजारी से अवगत कराया
1.5.2007 को आदि गोल्ड माइन की पत्रावली में गड़बड़ी करने के लिए प्रतिकूल प्रविष्टी दी गई
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