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...तो प्रदूषित नहीं हो पाएगा गंगाजल
देहरादून/रजा शास्त्री
Updated Sun, 21 Jul 2013 10:48 AM IST
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गंगाजल को बैक्टीरिया संक्रमित नहीं कर पाएंगे। आपदा के एक महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी गंगा के पानी में बैक्टीरिया लोड नहीं बढ़ सका है।
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उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के बाद अब केंद्रीय जल आयोग ने भी इस बात पर मोहर लगा दी है। दरअसल, गंगाजल में रहने वाले सूक्ष्म जीव बैक्टीरियोफाजिल्स ‘गंगा प्रहरी’ बन गए हैं जो नदी में आने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को खा रहे हैं।
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उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कुछ दिन पूर्व गंगाजल में बैक्टीरिया का जमाव न होने की वजह नदी में सामान्य से कई गुना अधिक जल मात्रा बताई थी।
यह आशंका व्यक्त की थी कि पानी कुछ कम होने पर बैक्टीरिया का कंसन्ट्रेशन बढ़ने लगेगा। लेकिन केंद्रीय जल आयोग की सैंपल रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पानी घटने पर भी गंगाजल में बैक्टीरिया लोड नहीं बढ़ेगा।
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विज्ञानियों का कहना है कि गंगाजल में विशेष प्रकार के बैक्टीरियोफाजिल्स हैं। ये गंगा के अस्तित्व में आने के समय से ही नदी में मौजूद हैं। एक कोशिकीय ये जीवाणु दूसरे सभी बैक्टीरिया को खा जाते हैं। बैक्टीरियाफाजिल्स बहुत तेजी से मल्टीप्लाई होते हैं।
गंगोत्री से गंगासागर तक ये जीवाणु नदी के पानी में हैं। इन्हीं की वजह से आपदाग्रस्त क्षेत्रों के मलबे की गंदगी बावजूद गंगाजल में बैक्टीरिया लोड नहीं बढ़ा है।
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय जल आयोग की पानी की जांच की साइटें ऋषिकेश तक हैं। आपदाग्रस्त क्षेत्र के नजदीक होने की वजह से यहीं सबसे बैक्टीरिया बढ़ने की चिकित्सा विज्ञानियों ने आशंका व्यक्त की थी। जल आयोग की रिपोर्ट में बताया गया कि गंगा जल की क्वालिटी खराब नहीं हुई है। बैक्टीरिया लोड भी नहीं बढ़ा।
बोर्ड के सदस्य सचिव विनोद सिंघल का कहना है कि बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) सामान्य रेंज के अंदर है। इससे भी साबित है कि बैक्टीरिया की संख्या गंगाजल में बढ़ नहीं पा रही है।
बाढ़ ने ‘नाप’ दिए जल उपकरण
नदियों के पानी की क्वालिटी जांचने के लिए लगे उपकरणों को बाढ़ बहा ले गई। नदियों के किनारे केंद्रीय जल आयोग की 11 साइटें हैं। इनमें से छह साइटों के उपकरण आपदा के दौरान बाढ़ बहा ले गई है।
इससे दिक्कत पैदा हो गई है। विभाग के विज्ञानियों का कहना है कि किसी तरह पानी की जांच का काम किया जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के उत्तरकाशी, कोटेश्वर, जोशीमठ, रुद्रप्रयाग, अलकनंदा, मंदाकिनी, श्रीनगर, कर्णप्रयाग, देवप्रयाग, ऋषिकेश समेत 11 स्थानों पर साइटें हैं।
आयोग के विज्ञानी यहां से पानी का सैंपल लेकर उसकी क्वालिटी की जांच करते हैं। आयोग के अधीक्षण अभियंता हरिकेश कुमार ने बताया कि बाढ़ में आधा दर्जन साइटों के उपकरण बह गए हैं। साइटों को फिर से व्यवस्थित किया जाएगा। फिलहाल साइटों पर काम चल रहा है।