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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Tehri News ›   Many of the hospital rooms inlaid locks

अस्पताल के कई कमरों पर जड़े ताले

Sun, 27 Nov 2016 10:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला िटटिहरी
ब्यूरो/अमर उजाला िटटिहरी Updated Sun, 27 Nov 2016 10:47 PM IST
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र थत्यूड़ में स्वास्थ्य विभाग के पार्टनर ने अस्पताल की संपत्तियों पर कब्जा जमा कर विभागीय परेशानी बढ़ा दी है। कई बार नोटिस देने के छह माह बाद भी प्राइवेट पब्लिक पार्टनर (पीपीपी) राजभरा मेडिकेयर प्रा. लि. कब्जे में लिए गए कमरों को खाली नहीं कर रहा है। इससे चिकित्सकों को अस्पताल का संचालन करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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जौनपुर ब्लॉक में स्थित पीएचसी थत्यूड़ को मई 2014 में राजभरा मेडिकेयर प्रा. लि. को पीपीपी मोड में दिया गया था, लेकिन कंपनी अस्पताल का ठीक से संचालन नहीं कर पाई तो स्वास्थ्य विभाग ने पार्टनरशिप वापस लेने की कार्रवाई शुरू की। इस पर कंपनी ने कोर्ट की शरण भी, लेकिन उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिली। तब स्वास्थ्य निदेशालय ने छह माह पहले कंपनी का एग्रीमेंट समाप्त कर अस्पताल खाली करने का नोटिस दिया। 24 नवंबर को फिर से स्वास्थ्य विभाग की संपत्ति खाली करने का नोटिस जारी करने के बाद भी कंपनी एक्स-रे रूम, ओटी कक्ष, डिस्पेंसरी कक्ष, टाइप-4 के चार और टाइप-2 के छह आवासीय कमरों पर ताला लगाए बैठी है, जिससे अस्पताल का संचालन करने में दिक्कतें आ रही हैं। पीएचसी के चिकित्साधिकारी डा. विनय ड्यूंडी ने बताया कि अधिकतर कमरों पर ताला लगा है। अस्पताल में तीन डाक्टर, एक फार्मासिस्ट, दो वार्ड ब्वाय और सफाई कर्मी कार्यरत हैं, लेकिन अधिकतर कक्ष में ताले लगे होने से मरीज भी अस्पताल में नहीं आ रहे हैं। कंपनी को कई बार कहने पर भी वह संपत्ति हैंडओवर नहीं कर रहे हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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कोट
कंपनी ने अभी हैंडओवर करने को मना किया है। कंपनी को जनवरी 2016 से भुगतान भी नहीं मिला है। उच्चाधिकारियों का कहना है, कि जल्द कोई अधिकारी भेजकर लिखित में हैंडओवर किया जाएगा। अभी कई कर्मचारियों को भी तनख्वाह नहीं मिली है, वह भी विरोध कर सकते हैं। - एमडी लखेड़ा, समन्वयक राजभरा मेडिकेयर।
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राजभरा मेडिकेयर को कई बार नोटिस दिया गया है। बावजूद वह संपत्ती हैंडओवर नहीं कर रहा है। जिससे वहां और स्टाफ नहीं भेज पा रहे हैं। आखिरी नोटिस के बाद अब प्रभारी चिकित्साधिकारी को कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा गया है। - डा. अर्जुन सिंह सेंगर, सीएमओ टिहरी।

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