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तीन साल बाद भी धरातल पर नहीं उतरी मुख्यमंत्री की घोषणा
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मुख्यमंत्री की घोषणा के तीन साल बाद भी आराकोट उप मंडी धरातल पर नहीं उतर पाई है। मंडी परिषद के अधिकारियों को उप मंडी के निर्माण के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति मिलने का इंतजार है। ऐसे में केंद्र सरकार की 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। चंबा-मसूरी फल पट्टी सहित नागणी क्षेत्र के काश्तकार अपनी उपज को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं।
चंबा-मसूरी फलपट्टी, नागणी और खाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सब्जी, फल और अन्य फसलों का उत्पादन होता है। लेकिन इस क्षेत्र में कृषि मंडी न होने के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों में बेचनी पड़ती है। वर्ष 2018 में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चंबा-मसूरी रोड पर आराकोट में उप मंडी खोलने की घोषणा की थी। आराकोट में वन भूमि के निरीक्षण के बाद छह हजार वर्ग मीटर की सिविल भूमि पर उप मंडी बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था। लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति के अभाव में उप मंडी का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है।
प्रगतिशील किसान खुशीलाल डबराल का कहना है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए ऋषिकेश या देहरादून मंडी जाना पड़ता है। जो किसान मंडी नहीं जा पाते है उन्हें बिचौलियों को फसल बेचनी पड़ती है।
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कोट
आराकोट उप मंडी का प्रस्ताव विभाग के स्तर पर तैयार किया गया था। लेकिन उप मंडी निर्माण के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पाई। विभाग को शासन के निर्देश का इंतजार है। - नंदनी उनियाल, सचिव मंडी परिषद ऋषिकेश।
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चंबा-मसूरी फलपट्टी, नागणी और खाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सब्जी, फल और अन्य फसलों का उत्पादन होता है। लेकिन इस क्षेत्र में कृषि मंडी न होने के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों में बेचनी पड़ती है। वर्ष 2018 में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चंबा-मसूरी रोड पर आराकोट में उप मंडी खोलने की घोषणा की थी। आराकोट में वन भूमि के निरीक्षण के बाद छह हजार वर्ग मीटर की सिविल भूमि पर उप मंडी बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था। लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति के अभाव में उप मंडी का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है।
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प्रगतिशील किसान खुशीलाल डबराल का कहना है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए ऋषिकेश या देहरादून मंडी जाना पड़ता है। जो किसान मंडी नहीं जा पाते है उन्हें बिचौलियों को फसल बेचनी पड़ती है।
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कोट
आराकोट उप मंडी का प्रस्ताव विभाग के स्तर पर तैयार किया गया था। लेकिन उप मंडी निर्माण के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पाई। विभाग को शासन के निर्देश का इंतजार है। - नंदनी उनियाल, सचिव मंडी परिषद ऋषिकेश।