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रस्सों और एंगिलों ने थामा डूबते मरीना का भविष्य
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नई टिहरी। काफी मशक्कत के बाद बीआरओ, लोनिवि, टीएचडीसी और जिला प्रशासन की टीम ने ढाई करोड़ की फ्लोटिंग मरीना को टिहरी झील में डूबने से बचा लिया है। मरीना का एक हिस्सा टेढ़ा होकर झील में डूबा हुआ है। रस्सों और एंगिलों के सहारे उसके टेढ़े हिस्से को बांधकर रखा गया है। मरीना को पहले जैसी स्थिति में लाने के लिए प्रशासन को अब टिहरी झील का जलस्तर कम होने का इंतजार है। आखिर मरीना रस्सों और एंगिलों के भरोसे कितने दिन तक सुरक्षित रह पाएगी इसे लेकर स्थानीय लोग शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
टिहरी झील में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन देेने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में ढाई करोड़ की फ्लोटिंग मरीना (चलता-फिरता रेस्टोरेंट) और दो करोड़ 17 लाख की लागत की बार्ज बोट को टिहरी झील में उतारा था। फ्लोटिंग मरीना में झील क्षेत्र में आने वाले सैलानियों को भोजन और अन्य खाद्य पदार्थ की सुविधा प्रदान करना था। बार्ज बोट से बांध प्रभावित झील के उस पार निवासरत प्रतापनगर क्षेत्र के लोगों को आवागमन की सुविधा मुहैया करना था, लेकिन ये दोनों ही महत्वपूर्ण योजनाएं उद्घाटन के बाद धरातल पर नहीं उतर पाई। चार साल से करोड़ों की फ्लोटिंग मरीना और बार्ज बोट झील किनारे संचालन की राह ताक रही है।
बीते मंगलवार सुबह को टिहरी झील का जलस्तर कम होने से झील किनारे खड़ी फ्लोटिंग मरीना का एक हिस्सा टेढ़ा होकर झील में डूब गया था। मरीना को पूरी तरह से झील में डूबने से बचाने के लिए पर्यटन विभाग, टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन प्राधिकरण, लोनिवि, टीएचडीसी के कर्मचारी और अधिकारी जुटे रहे। देर शाम को डीएम के निर्देश पर बीआरओ के अधिकारी और कर्मचारी भी झील किनारे पहुंचे। रस्सों और लोहे के एंगिलों से उन्होंने बार्ज बोट को बांधकर झील में डूबने से फिलहाल बचा लिया है। इससे पहले भी 21 नवंबर 2018 को झील का जलस्तर कम होने पर फ्लोटिंग मरीना का एक हिस्सा टेढ़ा होकर झील में डूब गया था, जिसे उस वक्त भी रस्सों और टीएचडीसी की पावर बोट से खींचकर झील किनारे खड़ा किया गया था।
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रस्सों और एंगिलों से मरीना को बांधकर फिलहाल झील में डूबने से बचा लिया गया है। झील का जलस्तर कम होने पर मरीना का जो हिस्सा टेढ़ा होकर डूबा है उसे सुरक्षित निकाला जाएगा। मरीना को कितना नुकसान हुआ है यह तकनीकी विशेषज्ञ ही जांच के बाद बता पाएंगे।
-अजयवीर सिंह, एसीईओ, टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन प्राधिकरण
टिहरी झील में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन देेने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में ढाई करोड़ की फ्लोटिंग मरीना (चलता-फिरता रेस्टोरेंट) और दो करोड़ 17 लाख की लागत की बार्ज बोट को टिहरी झील में उतारा था। फ्लोटिंग मरीना में झील क्षेत्र में आने वाले सैलानियों को भोजन और अन्य खाद्य पदार्थ की सुविधा प्रदान करना था। बार्ज बोट से बांध प्रभावित झील के उस पार निवासरत प्रतापनगर क्षेत्र के लोगों को आवागमन की सुविधा मुहैया करना था, लेकिन ये दोनों ही महत्वपूर्ण योजनाएं उद्घाटन के बाद धरातल पर नहीं उतर पाई। चार साल से करोड़ों की फ्लोटिंग मरीना और बार्ज बोट झील किनारे संचालन की राह ताक रही है।
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बीते मंगलवार सुबह को टिहरी झील का जलस्तर कम होने से झील किनारे खड़ी फ्लोटिंग मरीना का एक हिस्सा टेढ़ा होकर झील में डूब गया था। मरीना को पूरी तरह से झील में डूबने से बचाने के लिए पर्यटन विभाग, टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन प्राधिकरण, लोनिवि, टीएचडीसी के कर्मचारी और अधिकारी जुटे रहे। देर शाम को डीएम के निर्देश पर बीआरओ के अधिकारी और कर्मचारी भी झील किनारे पहुंचे। रस्सों और लोहे के एंगिलों से उन्होंने बार्ज बोट को बांधकर झील में डूबने से फिलहाल बचा लिया है। इससे पहले भी 21 नवंबर 2018 को झील का जलस्तर कम होने पर फ्लोटिंग मरीना का एक हिस्सा टेढ़ा होकर झील में डूब गया था, जिसे उस वक्त भी रस्सों और टीएचडीसी की पावर बोट से खींचकर झील किनारे खड़ा किया गया था।
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रस्सों और एंगिलों से मरीना को बांधकर फिलहाल झील में डूबने से बचा लिया गया है। झील का जलस्तर कम होने पर मरीना का जो हिस्सा टेढ़ा होकर डूबा है उसे सुरक्षित निकाला जाएगा। मरीना को कितना नुकसान हुआ है यह तकनीकी विशेषज्ञ ही जांच के बाद बता पाएंगे।
-अजयवीर सिंह, एसीईओ, टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन प्राधिकरण