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टिहरी जिले में महिला चिकित्सकों का टोटा

Wed, 04 Jul 2018 10:44 PM IST
Updated Wed, 04 Jul 2018 10:44 PM IST
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टिहरी जिले में महिला चिकित्सकों का टोटा
नई टिहरी। टिहरी जिले में महिला चिकित्सकों का टोटा बना हुआ है। इसके चलते दूरस्थ क्षेत्र की महिलाओं को प्रसव के लिए ऋषिकेश या देहरादून के चिकित्सालयों की शरण लेनी पड़ती है। ऐसे में खर्च तो बढ़ता ही है, साथ ही जान का जोखिम भी बना रहता है। लचर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में पिछले आठ सालों में जिले की पांच गर्भवती महिलाओं को जान गंवानी पड़ी है।
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जिले में महिला चिकित्सकों के 21 पद स्वीकृत है। इसके सापेक्ष आठ ही कार्यरत हैं और 13 पद रिक्त चल रहे हैं। जिला अस्पताल बौराड़ी, नरेंद्रनगर में एक महिला चिकित्सक तैनात है। थौलधार, जौनपुर, भिलंगना, जाखणीधार, हिंडोलाखाल विकासखंडों के चिकित्सालयों में कोई भी महिला चिकित्सक नहीं है। इसका सबसे अधिक खामियाजा गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है।
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केस एक
31 दिसंबर 2011 को भिलंगना के सुनारगांव की एक गर्भवती महिला को परिजन प्रसव के लिए देहरादून ले जा रहे थे। चंबा के निकट हुई वाहन दुर्घटना में गर्भवती महिला सहित परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई थी।
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केस दो
अगस्त 2011 में खघोली गांव की एक महिला को प्रसव के लिए हिंडोलखाल लाया जा रहा था। खडोली गांव से हिंडोलाखाल की पैदल दूरी पांच किमी होने के कारण प्रसव पीड़ा से कराहते हुए महिला ने आधे रास्ते में ही दम तोड़ दिया था।

केस तीन
9 अक्तूबर 2012 को प्रतापनगर चौदार गांव की गर्भवती महिला को परिजन प्रसव कराने नई टिहरी लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में एक बच्ची को जन्म देने के बाद अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला ने दम तोड़ दिया था।

केस चार
दो जून 2016 को थौलधार ब्लॉक के कुनेर गांव निवासी गजेंद्र की गर्भवती पत्नी को परिजन प्रसव कराने जिला अस्पताल बौराड़ी लाए थे। डॉक्टरों के अभाव में महिला को प्रसव के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया। महिला को लेकर परिजन चंबा के एक निजी अस्पताल में पहुंचे। वहां प्रसव कराने के कुछ देर बाद अधिक रक्तस्राव होने से महिला की मौत हो गई थी। बाद में नवजात बच्ची भी इस दुनिया से चल बसी थी।

केस पांच
31 मार्च 2018 को घनसाली बाजार में लोहे के औजार बनाने वाले कांशीराम की पत्नी की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिलखी में प्रसव के बाद मौत हो गई थी। बच्चा जनने के बाद भी महिला को लगातार रक्तस्राव होता रहा। परिजन उसे जिला अस्पताल बौराड़ी के लिए ला रहे थे कि रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया।

केस छह
डॉक्टर न मिलने पर सड़क पर दिया बच्चे को जन्म। वर्ष 2015 में प्रतापनगर खोलगढ़ गांव के धर्म सिंह पंवार की पत्नी को परिजन प्रसव कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रतापनगर ले गए, लेकिन वहां अस्पताल बंद मिलने पर परिजन लौट आए। अस्पताल से कुछ दूरी पर महिला ने प्रतापनगर बाजार में बच्चे को जन्म दिया।


इनका क्या है कहना------------
महिला चिकित्सकों के न होने से कई समस्याएं आती है। शासन को बराबर रिक्तियां भेजी जाती है। चिकित्सकों की नियुक्तियंा शासन स्तर से होनी है। विभाग के पास जो भी संसाधन उपलब्ध हैं वे समय-समय पर गर्भवती महिलाओं को उपलब्ध कराए जाते है।
-डा.भागीरथी जंगपांगी, सीएमओ टिहरी
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