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चैत्र मास की सक्रांत से फुल्यार त्यौहार शुरू
Updated Wed, 14 Mar 2018 10:32 PM IST
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नैनबाग (टिहरी)। चैत्र मास में मनाया जाने वाला फुल्यात त्योहार का शुभारंभ फूल पूजन के साथ शुरू हो गया। फुल्यात के पहले दिन छोटे बच्चों ने फूल तोड़कर अपने ईष्ट देवता और घरों की दहलीज पर चढ़ाए।
पहाड़ की लोक संस्कृति के अनुसार जौनपुर क्षेत्र में चैत्र मास की संक्रांति से फुल्यात त्योहार शुरू हो गया। बुधवार तड़के गांवों के बच्चों ने खेतों और आसपास के जंगलों से विभिन्न प्रकार के फूल तोड़कर ईष्ट देवता के मंदिर और घरों की दहलीज पर चढ़ाए। एक माह तक मनाए जाने वाले फुल्यात त्योहार में हर रोज नए फूल चढ़ाने की परंपरा है। त्योहार में फ्योंली के फूलों का खास महत्व माना जाता है। बैशाखी के दिन विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर फूल चढ़ाने वाले बच्चों को दक्षिणा दी जाती है। स्थानीय निवासी किशन सिंह पंवार, मुकेश पंवार, समीर आदि ने बताया कि त्योहार के समापन के बाद बैसाख मास से ग्रामीण क्षेत्रों में थौल (मेलों) का दौर भी शुरू हो जाएगा।
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पहाड़ की लोक संस्कृति के अनुसार जौनपुर क्षेत्र में चैत्र मास की संक्रांति से फुल्यात त्योहार शुरू हो गया। बुधवार तड़के गांवों के बच्चों ने खेतों और आसपास के जंगलों से विभिन्न प्रकार के फूल तोड़कर ईष्ट देवता के मंदिर और घरों की दहलीज पर चढ़ाए। एक माह तक मनाए जाने वाले फुल्यात त्योहार में हर रोज नए फूल चढ़ाने की परंपरा है। त्योहार में फ्योंली के फूलों का खास महत्व माना जाता है। बैशाखी के दिन विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर फूल चढ़ाने वाले बच्चों को दक्षिणा दी जाती है। स्थानीय निवासी किशन सिंह पंवार, मुकेश पंवार, समीर आदि ने बताया कि त्योहार के समापन के बाद बैसाख मास से ग्रामीण क्षेत्रों में थौल (मेलों) का दौर भी शुरू हो जाएगा।
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