उत्तराखंड में जारी रहेगा राष्ट्रपति शासन, 29 को फ्लोर टेस्ट नहीं
- शीर्ष अदालत करेगी मामले की विस्तृत सुनवाई
- हरीश रावत के स्टिंग को माना गंभीर मसला
- सुप्रीम कोर्ट ने पूछे सात सवाल
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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन जारी रहेगा और 29 अप्रैल को विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट पर रोक भी बरकरार रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपनी सुनवाई के दौरान उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने के नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले पर लगी रोक को जारी रखने का निर्णय लिया है।
शीर्ष अदालत ने इस मामले में विस्तृत सुनवाई का निर्णय लिया है। हाईकोर्ट ने राज्य में लगाए गए राष्ट्रपति शासन पर रोक लगा दी थी और रावत सरकार को बहाल करने के लिए निर्णय लिया था।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह की पीठ ने कहा कि लाख टके का सवाल यह है कि क्या विधानसभा की कार्यवाही केआधार पर केंद्रीय कैबिनेट उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकता है?
पीठ ने कहा कि आखिरकार फ्लोर टेस्ट ही अंतिम हल है। इस मामले पर विस्तृत सुनवाई करने का निर्णय लेते हुए उसने सात प्रश्न उठाए हैं। पीठ ने सुनवाई के लिए तीन, चार और पांच मई की तारीख तय करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर 13 मई तक फैसला आ जाएगा। अटॉर्नी जनरल ने एक बार फिर अदालत को यह सुनिश्चित किया है कि बिना अदालत की अनुमति के राष्ट्रपति शासन को नहीं हटाया जाएगा।
राष्ट्रपति शासन लगाना एक दुर्लभ कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना एक दुर्लभ कार्रवाई है। अगर सरकार अल्पमत में हो तो फ्लोर टेस्ट ही अंतिम समाधान है। पीठ ने कहा कि अगर हम राष्ट्रपति शासन को सही भी ठहराते हैं तो फ्लोर टेस्ट तो होगा ही।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल ने कहा कि धन विधेयक अगर विधानसभा में पारित नहीं हो पाता तो साफ है कि सरकार के पास बहुमत नहीं है। जवाब में पीठ ने कहा कि यहां यह बात महत्वपूर्ण है कि विधानसभा अध्यक्ष इस बात पर अडिग है कि धन विधेयक पारित हो गया है।
पीठ ने कहा कि अध्यक्ष विधानसभा का मुखिया होता है। कोई विधेयक पारित हुआ या नहीं, क्या केंद्र सरकार या राष्ट्रपति को इस बात पर गौर करना चाहिए। कितने लोगों ने विधेयक के पक्ष में वोट दिया और कितनों ने विपक्ष में, यह भी विधानसभा अध्यक्ष ही तय करता है।
पीठ ने यह भी कहा कि आखिरकार किसी और को विधानसभा की कार्यवाही से क्या लेना-देना है? यह किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का यह आधार हो सकता है? एक पक्ष का कहना है कि विधेयक पारित हो गया जबकि दूसरा पक्ष कह रहा है कि विधेयक पारित नहीं हुआ। पीठ ने कहा कि इसके लिए विस्तृत बहस की दरकार है।
'स्पीकर का हर निर्णय न्यायिक परीक्षण से बाहर नहीं'
वहीं अटॉर्नी जनरल ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा लिया गया हर निर्णय न्यायिक परीक्षण के दायरे के बाहर नहीं हो सकता। इतना ही नहीं स्टिंग ऑपरेशन (हरीश रावत को विधायकों की खरीद-फरोख्त संबंधी )भी राष्ट्रपति शासन लगाने का एक आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि धन विधेयक को 10 दिनों तक राज्यपाल के पास नहीं भेजा गया, यह एक मायने में दर्शाता है कि विधेयक वैध तरीके से पारित नहीं हुआ।
पीठ ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि क्या विधेयक को राज्यपाल के पास तत्काल नहीं भेजने के कारण राष्ट्रपति शासन लगाया गया? पीठ ने कहा कि हम स्टिंग ऑपरेशन को लेकर टेस्ट नहीं करने जा रहे लेकिन यह गंभीर मसला है। पीठ ने कहा कि ऐसा हर मामले को देखने को मिलता है। क्या स्टिंग ऑपरेशन के आधार पर राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है?
इन दिनों हर मामले में स्टिंग ऑपरेशन सामने आ जाता है। पीठ ने कहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त पर लोगों पर मुकदमा चलाया जा सकता है लेकिन क्या इस आधार पर राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।
वहीं हरीश रावत की ओर से पेश सिंघवी और सिब्बल ने कहा कि फ्लोर टेस्ट राष्ट्रपति शासन के आड़े नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि फ्लोर टेस्ट ही एकमात्र इसका समाधान है। उन्होंने कहा कि अगर भ्रष्टाचार ही राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार हो तो हर राज्य सरकार को खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुख की बात है कि दिल्ली की सरकार यह तय कर रही है कि विधानसभा में विधेयक सही तरीके से पारित नहीं हुआ।
ये हैं सुप्रीम कोर्ट के सात सवाल
1. क्या राज्यपाल मौजूदा तौर-तरीके से संविधान के अनुच्छेद-175(2) के तहत संदेश भेज सकते है?
2. क्या राज्यपाल विधानसभा अध्यक्ष को मतों का विभाजन करने के लिए कह सकता है? यह देखते हुए कि दोनों ही संवैधानिक अथॉरिटी है।
3. क्या फ्लोर टेस्ट में देरी के आधार पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है?
4 ऐसा माना जाता है कि अगर धन विधेयक पास नहीं हुआ तो सरकार चली गई लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह कौन कहेगा कि विधेयक पास हुआ या नहीं, अगर विधानसभा अध्यक्ष यह नहीं कहता हो?
5 धन विधेयक की क्या स्थिति है? जब राष्ट्रपति शासन प्रभावी हुआ तो उस वक्त धन विधेयक की क्या स्थिति थी?
6 क्या अनुच्छेद-356 के तहत राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए विधायकों को अयोग्य करार देना मायने रखती है?
7 क्या राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए विधानसभा की कार्यवाही पर गौर किया जाना चाहिए?