भाजपा के दलित कार्ड से बसपा में बेचैनी
- अमित शाह की सक्रियता से दलित वोट बैंक में सेंध का अंदेशा
- दलित वोटों के खिसकने को लेकर सबसे ज्यादा चौकसी बरतनी होगी बसपा को
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समरसता समारोह के बहाने हरिद्वार में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की सक्रियता ने दलित वोट बैंक का गणित गड़बड़ाने का शिगूफा छेड़ दिया है।
विपक्षी दल इसे दलित वोट बैंक में सेंधमारी की जुगत मान रहे हैं। दलित वोटों के खिसकने को लेकर सबसे ज्यादा चौकसी बसपा को बरतनी होगी।
उत्तराखंड के 18 प्रतिशत दलितों पर भाजपा का फोकस
बाबा साहेब की जयंती पर अमित शाह के हरिद्वार पहुंचने को राजनीतिक पंडित भाजपा दवारा राज्य के 18 प्रतिशत दलितों पर फोकस करने के चश्मे से देख रहे हैं। दअरसल, हरिद्वार जिले में दलित वोट निर्णायक स्थिति में रहते है।
लोकसभा के चुनाव में हमेशा बसपा मुख्य मुकाबले में रही है और पिछले विधानसभा चुनाव में तीनों विधायक हरिद्वार जनपद से ही चुनकर आए। पिछले लोकसभा चुनाव को छोड़ दे तो अभी तक परंपरागत रूप से दलित वोट बसपा के साथ ही रहा है। हालांकि पिछले विस चुनाव में 2007 के बजाय सीटों की संख्या तो घटी, लेकिन वोट प्रतिशत जस का तस रहा।
पहाड़ पर चढ़ने से पहले ही लगता है बसपा का हाथी हांफने
2012 में झबरेड़ा सीट से हरिदास, मंगलौर से सरवत करीम अंसारी और भगवानपुर से सुरेंद्र राकेश ही बसपा के टिकट पर जीत हासिल कर सके। स्वर्गीय सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद उनकी पत्नी ममता राकेश कांग्रेस के पाले से भगवानपुर सीट से जीतकर विधायक बनी।
मौजूदा हालातों को देखते हुए भाजपा हरिद्वार के अलावा दूसरे मैदानी जिले ऊधमसिंह नगर में भी बसपा के दलित वोट बैंक में सेंध लगाकर अपना किला मजूबत करना चाहती है।
बसपा का फोकस केवल मैदान
वैसे भी हर चुनाव में बसपा का हाथी पहाड़ पर चढ़ने से पहले ही हांफने लगता है, इसलिए पार्टी मैदानी क्षेत्रों में ही फोकस करना चाहती है।
उधर, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मंशा के अनुरूप दलित वर्ग को अपने साथ जोड़ना भाजपा प्रदेश नेतृत्व के लिए भी कम चुनौती पूर्ण नहीं होगा। इसके लिए प्रदेश संगठन को दलितों से जुड़े कार्यक्रमों की रूप रेखा तैयार कर जमीन पर उतारना होगा। देहरादून में भी रायपुर, राजपुर, डोईवाला, विकासनगर विस सीटों में दलित मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है।