सियासत की पिच पर स्टिंग की गुगली और फंस गए 'सरकार'
- सीएम का स्टिंग सियासी घमासान में लेकर आया नया भूचाल।
- इसके पहले दो और स्टिंग हो चुके हैं कार्यकाल में।
- सियासत के खिलाड़ी को भारी पड़ेगा स्टिंग।
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अब सियासी घमासान के बीच आए स्टिंग ने हरीश रावत के लिए बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। हार्स ट्रेडिंग का जो आरोप कांग्रेस जिस भाजपा पर चिपका रही थी वह अब स्टिंग के बाद कांग्रेस के हाथ पर चस्पा हो गया।
स्टिंग ने सियासी तूफान को एक हद तक बागियों के पक्ष में लाकर खड़ा कर दिया है। हैरानी यह भी है कि हरीश रावत खुद जिस स्टिंग का शिकार हुए वह भी इसी मीडिया हाउस से जुड़े लोगों का था जिन्होंने कांग्रेस सरकार में पहले दो बार सरकार स्टिंग किया है।
दो बार में सबक नहीं सीखना पड़ेगा रावत पर भारी
प्रदेश में बागियों की खरीद फरोख्त को लेकर सीएम हरीश रावत के साथ बातचीत का स्टिंग मचे सियासी घमासान में नया भूचाल लेकर आया है। स्टिंग में जिस तरह से सीएम हरीश रावत बातचीत कर रहे हैं उससे साफ हो रहा है कि वह कथित डील को किसी भी तरह से रिकॉर्ड किये जाने से अनजान थे।
यह तब है जब उनकी सरकार कुछ माह पहले आबकारी नीति को लेकर आईएएस अफसर मोहम्मद शाहिद के स्टिंग के चलते घिर गई थी। आबकारी स्टिंग अभी तक सदन में गूंजता है और चुनावी मुद्दा बन चुका है। ऐसे में सरकार ने उससे सबक लेकर सचेत होने के बजाए सीडी कांड से बड़ी गलती कर दी।
प्रसारित हो रहे स्टिंग में सीएम हरीश रावत बागी विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर बातचीत करते दिख रहे हैं। इससे हार्स ट्रेडिंग का जो आरोप अब भाजपा पर लग रहा था वह दांव उलटा कांग्रेस पर पड़ा है।
जान कर भी फंस गए हरदा
स्टिंग टीवी न्यूज चैनलों पर प्रसारित होने के बाद सीएम ने तुरंत पत्रकार वार्ता बुलाकर उसका खंडन कर दिया। उन्होंने यह तक कहा कि जिस पत्रकार ने यह स्टिंग किया है उसकी हकीकत से सब वाकिफ हैं। ऐसा बोल सीएम ने यह तो साफ किया कि वह पत्रकार को जानते थे, लेकिन पत्रकार का बयान ठीक इससे विपरीत है। उनकी माने तो सीएम उनसे मिलने खुद जौलीग्रांट गए थे। जहां इस स्टिंग की शूटिंग हुई।
सरकार गिराने में विधायक भी घिरे थे
मौजूदा कांग्रेस सरकार के खिलाफ यह तीसरा स्टिंग है, जिसकी शुरूआत सरकार में हिस्सेदार बसपा पार्टी के एक विधायक सरबत करीम अंसारी को दिखाया गया था। स्टिंग करने वाले इसी मीडिया हाउस का आरोप था कि विधायक सरकार गिराने के लिए पैसे ले रहे हैं, जबकि विधायक ने अपनी सफाई में इस बात से इनकार किया। यह मामला लंबे समय तक सदन में गूंजा।
आगे भी स्टिंग बढ़ाएगा कांग्रेस की दिक्कतें
सीएम हरीश रावत जिस स्टिंग आपरेशन में हार्स ट्रेडिंग जैसे विषय पर बातचीत करते दिख रहे हैं वह 28 मार्च के संकट से अधिक भविष्य में भी कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ेगा।
अब तक आबकारी सचिव सीडी कांड का मामला कांग्रेस सरकार की किरकिरी करता रहा, लेकिन इस स्टिंग में सीएम के होने से यह मामला भाजपा के लिए आगामी चुनाव में प्रचार का मुद्दा रहेगा, जिसे भाजपा ने अभी से भुनाना शुरू कर दिया है।
अगर स्टिंग की सत्यता प्रमाणित होती है तो यह भाजपा के लिए रामबाण साबित होगा। अब तक मुद्दा विहीन और कमजोर विपक्ष का आरोप झेल रही भाजपा इस मुद्दे को कांग्रेस के खिलाफ सबसे बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेगी।