फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   saint are not happy about kedarnath worship

केदारनाथ में पूजा से रूठ गए संत?

Thu, 12 Sep 2013 09:08 PM IST
अमर उजाला, कौशल सिखौला, हरिद्वार
अमर उजाला, कौशल सिखौला, हरिद्वार Updated Thu, 12 Sep 2013 09:08 PM IST
विज्ञापन
saint are not happy about kedarnath worship

केदारनाथ में पूजा प्रारम्भ होने से धर्मजगत में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ संत खुश हैं तो अधिकांश नाखुश। संतो ने बिना यात्री पूजा को औचित्यहीन बताया है।

विज्ञापन


संतों तथा धर्मज्ञों का मानना है कि सरकार को यात्रियों को भी केदारनाथ ले जाने का प्रयत्न करना चाहिए। बिना यात्री पूजा का कोई अर्थ नहीं है।

तस्वीरों में देखें...राजनीति के बीच केदारबाबा का 'महाभिषेक'
विज्ञापन


अभा अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि केदारनाथ में यात्रियों के दर्शन पर लगाया गया प्रतिबंध दुर्भाग्यपूर्ण है।

निशंक पहुंचे पैदल
जब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल अपने साथियों के साथ पैदल मंदिर तक जा सकते हैं, तब यात्रियों पर प्रतिबंध का क्या औचित्य है।

पढें, ‘मिशन मोदी’ को रामदेव ने किया 'बैग पैक'
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि निशंक के साथ करीब 100 कार्यकर्ता भी पैदल मार्ग से पहुंच गए। जाहिर है कि पैदल मार्ग दुरुस्त किया जाता तो तमाम यात्री भी पूजा का दर्शन कर सकते थे।


जूना अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती ने कहा कि केदारनाथ धाम में पूजा का औचित्य तभी है जब श्रद्धालु भाग ले सकें।

मठ-मंदिरों की रक्षा जरूरी
पौराणिक मठ-मंदिरों की रक्षा जरूरी है और नागरिकों के लिए मार्ग का निर्माण पूजा से पहले किया जाना चाहिए था। श्रीमहंत प्रेम गिरि और राज गिरि ने पूजा का स्वागत करते हुए मांग की है कि तत्काल यात्रियों के लिए पैदल मार्ग खोला जाए।

पढें, केदारनाथः डमरू बजा नहीं, महाराज ने बजा दिया 'डंका'

अभा संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी दिगम्बर ने कहा कि पूजा के लिए नेताओं को नहीं, जनता को पहुंचना चाहिए। जब तक धर्मावलम्बी नहीं जाएंगे, पूजा अधूरी ही रहेगी।

विंटर सीट क्या बुरी थी
कालिका पीठाधीश्वर सुरेंद्र नाथ अवधूत ने यात्रियों के लिए तत्काल मार्ग बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक मार्गों को दुरुस्त नहीं किया जाता, पूजा का कोई औचित्य नहीं है।

पढें, पूजा शुरु हो ना हो...शुरु हुई नेताओं की 'नौटंकी'

पूजा तो शारदीय विश्राम स्थल पर भी चल रही थी। श्रीमहंत विनोद गिरि ने पूजा का स्वागत करते हुए यात्रियों को ले जाने पर बल दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed