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प्रताड़ना के चलते घर छोड़कर किराए पर रहने को मजबूर वृद्धा
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लालपुर में दिव्यांग बेटे के साथ देबुली देवी।
- फोटो : RUDRAPUR
सौतेले पुत्र के अत्याचार से एक वृद्धा और उसका दिव्यांग पुत्र परेशान है। सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी की पत्नी होने के बावजूद वृद्धा को पुलिस अधिकारियों से भी निराशा हाथ लगी है। वह अपना घर छोड़कर लालपुर में किराए के मकान में रहने को मजबूर है।
नैनीताल जिले के रामनगर के उदयपुरी चोपड़ा ग्राम की रहने वाली देबुली देवी (70) के पति कमल सिंह पुलिस विभाग में चालक थे। सेवानिवृत्त होने के बाद 15 साल पहले उनकी मौत हो गई थी। कमल की पत्नी और देबुली के पति की मौत के बाद दोनों ने दूसरी शादी की थी। पहली शादी से दोनों के एक-एक पुत्र है। अपनी मृत्यु से पहले कमल को घर में कलह की संभावना थी। इसके चलते कमल ने अपनी पेंशन व मकान देबुली के नाम कर दिया था।
यही पेंशन और मकान देबुली की जान के दुश्मन बन गए हैं। देबुली ने बताया कि पेंशन और मकान अपने नाम करने को लेकर उसका सौतेला पुत्र उन्हें प्रताड़ित करने लगा था। अपनी व अपने दिव्यांग पुत्र की जान का खतरा देख कर उसने पुलिस में शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस ने ही उन्हें धमकाना शुरू कर दिया था।
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उन्होंने इसकी शिकायत पीएमओ कार्यालय, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, पुलिस महानिदेशक सहित सभी उच्चाधिकारियों से की लेकिन कहीं से भी मदद नहीं मिली है। इसके बाद जान बचाने के लिए उन्होंने अपना घर छोड़ दिया। बूढ़ी होने के कारण वह कोई काम नहीं कर सकती और पुत्र दिमागी और शारीरिक रूप से दिव्यांग है। उन्हें थोड़ी-बहुत पेंशन मिलती है जो किराये में ही खर्च हो जाती है। वह इधर उधर से मांग कर किया तरह अपना जीवन यापन कर रही हैं।
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नैनीताल जिले के रामनगर के उदयपुरी चोपड़ा ग्राम की रहने वाली देबुली देवी (70) के पति कमल सिंह पुलिस विभाग में चालक थे। सेवानिवृत्त होने के बाद 15 साल पहले उनकी मौत हो गई थी। कमल की पत्नी और देबुली के पति की मौत के बाद दोनों ने दूसरी शादी की थी। पहली शादी से दोनों के एक-एक पुत्र है। अपनी मृत्यु से पहले कमल को घर में कलह की संभावना थी। इसके चलते कमल ने अपनी पेंशन व मकान देबुली के नाम कर दिया था।
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यही पेंशन और मकान देबुली की जान के दुश्मन बन गए हैं। देबुली ने बताया कि पेंशन और मकान अपने नाम करने को लेकर उसका सौतेला पुत्र उन्हें प्रताड़ित करने लगा था। अपनी व अपने दिव्यांग पुत्र की जान का खतरा देख कर उसने पुलिस में शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस ने ही उन्हें धमकाना शुरू कर दिया था।
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उन्होंने इसकी शिकायत पीएमओ कार्यालय, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, पुलिस महानिदेशक सहित सभी उच्चाधिकारियों से की लेकिन कहीं से भी मदद नहीं मिली है। इसके बाद जान बचाने के लिए उन्होंने अपना घर छोड़ दिया। बूढ़ी होने के कारण वह कोई काम नहीं कर सकती और पुत्र दिमागी और शारीरिक रूप से दिव्यांग है। उन्हें थोड़ी-बहुत पेंशन मिलती है जो किराये में ही खर्च हो जाती है। वह इधर उधर से मांग कर किया तरह अपना जीवन यापन कर रही हैं।