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आईटीआई के दोबारा संचालन के लिए धरना जारी
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चिरबटिया आईटीआई के दोबारा संचालन की मांग को लेकर ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों का क्रमिक अनशन तीसरे दिन भी जारी रहा। इधर, कांग्रेस पार्टी ने भी ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन देते हुए प्रदेश सरकार व रुद्रप्रयाग के विधायक पर राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान को बंद करने का आरोप लगाया है।
सोमवार को चिरबटिया में क्रमिक अनशन पर बैठे ग्रामीणों का कहना था कि जब तक सरकार की ओर से आईटीआई के पुन: संचालन का शासनादेश जारी नहीं होता, वे आंदोलनरत रहेंगे। जरूरी हुआ तो भूख हड़ताल के साथ ही मयाली-चिरबटिया-घनसाली मार्ग पर चक्काजाम व तहसील जखोली में प्रदर्शन भी किया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता वैशाखी लाल, ग्राम प्रधान दीपक कैंतुरा आदि का कहना है कि वर्ष 1992 में आईटीआई का संचालन शुरू हुआ था। इस संस्थान में जखोली ब्लॉक समेत टिहरी के नजदीकी गांवों के युवा औद्योगिक शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। संस्थान के भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों ने विभाग को 20 नाली भूमि भी उपलब्ध कराई लेकिन सर्वेक्षण से आगे बात नहीं बन पाई। आखिरकार सरकार ने वर्ष 2019 में आईटीआई को बंद कर दिया, जिसका जनता पुरजोर विरोध कर रही है।
इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री मातबर सिंह कंडारी ने आईटीआई बंद करने के पीछे सरकार और रुद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी की साजिश बताया है। भाजपा सरकार विकास का दिखावा कर आमजन से जुड़ी योजनाओं, संस्थाओं को बंद करने का काम कर रही है। दूसरी तरफ ब्लॉक प्रमुख प्रदीप थपलियाल ने भी ग्रामीणों के आंदोलन का समर्थन किया है। इस मौके पर संघर्ष समिति के अध्यक्ष सैन सिंह मेहरा, पूर्व प्रधान प्रेम सिंह, रामरतन पंवार, कमल सिंह, दर्शनी देवी, विक्रम पंवार, वीरेंद्र कंडवाल, अर्जुन मेहरा, गुमान सिंह कैंतुरा आदि मौजूद थे।
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सोमवार को चिरबटिया में क्रमिक अनशन पर बैठे ग्रामीणों का कहना था कि जब तक सरकार की ओर से आईटीआई के पुन: संचालन का शासनादेश जारी नहीं होता, वे आंदोलनरत रहेंगे। जरूरी हुआ तो भूख हड़ताल के साथ ही मयाली-चिरबटिया-घनसाली मार्ग पर चक्काजाम व तहसील जखोली में प्रदर्शन भी किया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता वैशाखी लाल, ग्राम प्रधान दीपक कैंतुरा आदि का कहना है कि वर्ष 1992 में आईटीआई का संचालन शुरू हुआ था। इस संस्थान में जखोली ब्लॉक समेत टिहरी के नजदीकी गांवों के युवा औद्योगिक शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। संस्थान के भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों ने विभाग को 20 नाली भूमि भी उपलब्ध कराई लेकिन सर्वेक्षण से आगे बात नहीं बन पाई। आखिरकार सरकार ने वर्ष 2019 में आईटीआई को बंद कर दिया, जिसका जनता पुरजोर विरोध कर रही है।
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इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री मातबर सिंह कंडारी ने आईटीआई बंद करने के पीछे सरकार और रुद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी की साजिश बताया है। भाजपा सरकार विकास का दिखावा कर आमजन से जुड़ी योजनाओं, संस्थाओं को बंद करने का काम कर रही है। दूसरी तरफ ब्लॉक प्रमुख प्रदीप थपलियाल ने भी ग्रामीणों के आंदोलन का समर्थन किया है। इस मौके पर संघर्ष समिति के अध्यक्ष सैन सिंह मेहरा, पूर्व प्रधान प्रेम सिंह, रामरतन पंवार, कमल सिंह, दर्शनी देवी, विक्रम पंवार, वीरेंद्र कंडवाल, अर्जुन मेहरा, गुमान सिंह कैंतुरा आदि मौजूद थे।
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