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द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम पर मंडरा रहा खतरा

Tue, 01 Jun 2021 09:45 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jun 2021 09:45 PM IST
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Second Kedar Madmaheshwar Dham is under threat
पंच केदार में द्वितीय मद्महेश्वर धाम पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। पहाड़ी पर हो रहे भूस्खलन से हल्की बारिश में पानी और मिट्टी मंदिर परिसर तक पहुंच रही है जिससे जानमाल के नुकसान का खतरा बना हुआ है। पिछले साल जुलाई में यहां मंदिर परिसर में कई फुट पानी और मलबा भर गया था। इसके बावजूद अब तक मंदिर की सुरक्षा के लिए कार्ययोजना नहीं बन पाई है।
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मद्महेश्वर धाम ढलान वाली पहाड़ी की तलहटी पर स्थित है। पहाड़ी से बारिश का पानी सीधे मंदिर क्षेत्र तक पहुंचता है जिससे जलभराव की स्थिति बनी रहती है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की ओर से इस पहाड़ी क्षेत्र में कई स्थानों पर जलमोड़ नाली बनाई गई है लेकिन नियमित देखरेख व संसाधनों के अभाव में ये क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे पानी सीधे मंदिर परिसर तक पहुंच रहा है। पानी के तेज बहाव से बुग्याली क्षेत्र से मिट्टी भी बह रही है जिससे पर्यावरण को भी खतरा हो रहा है। पिछले साल 19 जुलाई की रात तेज बारिश से पहाड़ी से पानी और भारी मलबा मंदिर परिसर में जमा हो गया था। मंदिर के पुजारी समेत अन्य लोगों ने भागकर जान बचाई थी। बारिश के सीजन में कई बार यह समस्या हुई। इस दौरान केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से त्वरित कार्रवाई की मांग की थी लेकिन अब तक मंदिर की मंदिर की सुरक्षा तो दूर कार्ययोजना तक नहीं बन पाई है।
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पंच गौंडारी व ग्राम प्रधान वीर सिंह पंवार, मदन सिंह पंवार, कुंवर सिंह पंवार, शिवानंद पंवार, भगत सिंह पंवार, जिला पंचायत सदस्य विनोद राणा, शिव सिंह रावत का कहना है कि केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। किसी ने भी कार्रवाई तो दूर, पत्र का जवाब तक नहीं दिया है। सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए तो मंदिर क्षेत्र में नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्र में बरसाती पानी के बहाव को रोकने के लिए जलमोड़ नाली के साथ ही पौधरोपण पर जोर दिया है जिससे पानी मंदिर परिसर तक न पहुंचे।
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द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम की ऊपरी तरफ की पहाड़ी पर जलमोड़ नाली निर्माण के लिए शासन को पिछले साल 8 लाख का प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन अब तक जवाब नहीं मिल पाया है। धन स्वीकृत होने पर प्राथमिकता से निर्माण करवाया जाएगा।
-ललित मोहन नेगी, रेंजर ऊखीमठ रेंज, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग गोपेश्वर/चमोली
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