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अपने मंदिर में हुए विराजमान साणेश्वर महादेव
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रप्रयाग
Updated Mon, 11 Jan 2016 06:45 PM IST
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सोमवार को तीली गांव में सुबह सात बजे से ही पंडितों ने देवता की विशेष पूजा-अर्चना शुरू की। इसके बाद आराध्य ने गांव का भ्रमण कर भक्तों की कुशलक्षेम पूछी। ग्रामीणों ने गांव की सीमा तक देवता की डोली को विदा किया। इस मौके पर कई ध्याणिया भावुक होकर रोने लगी। दोपहर एक बजे आराध्य अपने मंदिर पहुंचे। देवता ने अपने भक्तों से जब मंदिर में प्रवेश की अनुमति मांगी तो भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा।
दिवारा समिति के अध्यक्ष वीरपाल सिंह रावत ने बताया कि दूसरे चरण की दिवारा अगले वर्ष होगी। सभी चरणों की दिवारा पूरी होने के बाद गांव में 27 दिन का महायज्ञ होगा। एक माह तक चली प्रथम चरण की दिवारा में राजेंद्र रावत, दर्शन रावत, नरेंद्र रावत, आरएस पंवार, कलम सिंह रावत आदि पहले दिन से साथ चल रहे थे।
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विदित हो कि बीते वर्ष 13 दिसंबर को भगवान साणेश्वर की दिवारा यात्रा का प्रथम चरण शुरू हुआ था। 14 वर्ष बाद आयोजित इस अनुष्ठान को लेकर लोगों में खासा उल्लास देखने को मिला। देवता ने 28 से अधिक गांवों का भ्रमण किया। यात्रा के दौरान भगवान साणेश्वर महाराज के कई रूप देखने को मिले। एक तरफ आराध्य के तौर पर गांवों में लोगों के दुख-दुख सुन उनका निवारण किया। वहीं दूसरी रक्षक के रूप में अपने भक्तों को सुरक्षा का भरोसा भी दिया।
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