रुद्रपुर। जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में कुपोषित, अतिकुपोषित व सुपोषित बच्चों की जांच अब एमयूएसी टेप (मध्य ऊपरी बांह नापने का यंत्र) से की जाएगी। यंत्र के पैमाने से बच्चों में कुपोषण, अतिकुपोषण और सुपोषण का पता चलेगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी उदय प्रताप सिंह ने जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एमयूएसी टेप से जांच के निर्देश दिए हैं।
जिले के 2300 आंगनबाड़ी केंद्रों में महिला एवं बाल विकास विभाग में 4862 कुपोषित, 493 अतिकुपोषित व 711 सुपोषित हुए बच्चे पंजीकृत हैं। बच्चों का कुपोषण खत्म करने के लिए विभाग युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा है। आहार व पोषण विशेषज्ञ डॉ. अंशुल टंडन ने बताया कि एमयूएसी टेप का बच्चों की बांह पर प्रयोग करके कुपोषण, अतिकुपोषण के होने का पता चल जाएगा। टेप से मापने के दौरान यदि पैमाना लाल रंग में आता है तो इससे बच्चों में अतिकुपोषण की पुष्टि होती है। इसके बाद बच्चों को सीधे अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जाता है। टेप में यदि नारंगी रंग आता है तो बच्चों में कुपोषण की शिकायत होती है। इसके बाद बच्चों को अनुपूरक आहार देना चाहिए। यदि बच्चे की बांह में टेप पीले रंग तक आता है तो उसमें कम कुपोषण होता है। आहार विशेषज्ञ समय-समय पर उनकी जांच करते हैं। टेप के हरे रंग पर बच्चों में सुपोषण दर्शाता है।