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Rudraprayag News: मां मीना की ममता ने देश सेवा को सर्वोपरि माना
Sat, 09 May 2026 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Sat, 09 May 2026 11:40 PM IST
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पति के बलिदान के बाद मां ने बेटे को सौंपी देश की सुरक्षा की कमानटैग- मात़ृत्व दिवस हेतु प्रेषित
सतीश भट्ट
जखोली। देवभूमि उत्तराखंड से वीरता की कहानियां देश के मान सम्मान की गवाह रही है। यहां ब्लाक जखोली के कोठियाड़ा गांव की मां मीना देवी ने त्याग और जज्बे की मिसाल पेश की है। पति की शहादत के बाद भी मां की ममता ने देश सेवा को सर्वोपरि माना और अपने इकलौते बेटे को भारतीय सेना की गौरवशाली वर्दी पहना दी। मीना देवी के पति भगवती प्रसाद कोठारी, आठवीं गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे और वर्ष 1998 में राष्ट्र की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। परिवार की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मीना देवी ने विपरीत परिस्थितियों में भी साहस नहीं खोया। वह बताती हैं कि उनके ससुर भी फौज में रहकर देश सेवा कर चुके थे। पति के बलिदान के बाद उनका केवल एक ही लक्ष्य था कि उनका पुत्र भी उसी रेजिमेंट का हिस्सा बने। मां माता के संकल्प का परिणाम यह कि वर्ष 2009 में उनका पुत्र आशीष कोठारी भी गढ़वाल राइफल्स में भर्ती होकर सीमाओं की रक्षा में तैनात हो गया। आज कोठियाड़ा गांव का यह परिवार उत्तराखंड की उस वीरगाथा का प्रतीक बन गया है जो मां का त्याग और राष्ट्र धर्म का प्रतीक है।
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सतीश भट्ट
जखोली। देवभूमि उत्तराखंड से वीरता की कहानियां देश के मान सम्मान की गवाह रही है। यहां ब्लाक जखोली के कोठियाड़ा गांव की मां मीना देवी ने त्याग और जज्बे की मिसाल पेश की है। पति की शहादत के बाद भी मां की ममता ने देश सेवा को सर्वोपरि माना और अपने इकलौते बेटे को भारतीय सेना की गौरवशाली वर्दी पहना दी। मीना देवी के पति भगवती प्रसाद कोठारी, आठवीं गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे और वर्ष 1998 में राष्ट्र की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। परिवार की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मीना देवी ने विपरीत परिस्थितियों में भी साहस नहीं खोया। वह बताती हैं कि उनके ससुर भी फौज में रहकर देश सेवा कर चुके थे। पति के बलिदान के बाद उनका केवल एक ही लक्ष्य था कि उनका पुत्र भी उसी रेजिमेंट का हिस्सा बने। मां माता के संकल्प का परिणाम यह कि वर्ष 2009 में उनका पुत्र आशीष कोठारी भी गढ़वाल राइफल्स में भर्ती होकर सीमाओं की रक्षा में तैनात हो गया। आज कोठियाड़ा गांव का यह परिवार उत्तराखंड की उस वीरगाथा का प्रतीक बन गया है जो मां का त्याग और राष्ट्र धर्म का प्रतीक है।