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बंदरों के उत्पात से लोगों का जीना दूभर
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बंदरों के उत्पात से लोगों का जीना दूभर हो गया है। तड़के से ही बंदर झुंड में घरों, स्कूल के आंगन से रास्तों व बाजार में उछलकूद कर लोगों पर झपट्टा मार रहे हैं। इससे निरंतर दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन और व्यापारियों ने तहसील प्रशासन व वन विभाग से बंदरों से निजात दिलाने की मांग की है।
लंबे समय से गुप्तकाशी क्षेत्र में बंदर आतंक का पर्याय बने हुए हैं। मंदिर मार्ग से लेकर बाजार व अन्य स्थानों पर बंदरों का झुंड अब तक कई लोगों पर झपट्टा मारकर घायल कर चुका है। वहीं, जीआईसी समेत अन्य शिक्षण संस्थाओं में भी बंदरों से स्कूली बच्चों को खतरा बना हुआ है। शिक्षाविद् कमल सिंह राणा, प्रदीप सेमवाल, रचना रावत, टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष राय सिंह राणा का कहना है कि प्रशासन व वन विभाग को स्थिति से कई बार अवगत कराने पर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। बंदर झुंड में कभी भी कहीं पर लोगों पर हमला कर रहे हैं जिससे जानमाल के नुकसान का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन व वन विभाग ने मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
उधर, ऊखीमठ में भी बंदरों के आतंक से लोग सहमे हुए हैं। यहां तीन माह में बंदरों द्वारा आठ लोगों को घायल किया जा चुका है। बावजूद इसके नगर पंचायत व प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सरपंच पवन राणा का कहना है कि बंदरों के निजात दिलाने के लिए जो आश्वासन उन्हें मिले थे, उसके हिसाब से सहयोग नहीं मिल रहा है।
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लंबे समय से गुप्तकाशी क्षेत्र में बंदर आतंक का पर्याय बने हुए हैं। मंदिर मार्ग से लेकर बाजार व अन्य स्थानों पर बंदरों का झुंड अब तक कई लोगों पर झपट्टा मारकर घायल कर चुका है। वहीं, जीआईसी समेत अन्य शिक्षण संस्थाओं में भी बंदरों से स्कूली बच्चों को खतरा बना हुआ है। शिक्षाविद् कमल सिंह राणा, प्रदीप सेमवाल, रचना रावत, टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष राय सिंह राणा का कहना है कि प्रशासन व वन विभाग को स्थिति से कई बार अवगत कराने पर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। बंदर झुंड में कभी भी कहीं पर लोगों पर हमला कर रहे हैं जिससे जानमाल के नुकसान का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन व वन विभाग ने मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
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उधर, ऊखीमठ में भी बंदरों के आतंक से लोग सहमे हुए हैं। यहां तीन माह में बंदरों द्वारा आठ लोगों को घायल किया जा चुका है। बावजूद इसके नगर पंचायत व प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सरपंच पवन राणा का कहना है कि बंदरों के निजात दिलाने के लिए जो आश्वासन उन्हें मिले थे, उसके हिसाब से सहयोग नहीं मिल रहा है।
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