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Rudraprayag News: मौसम खराब होने पर रोकी जा रही केदारनाथ यात्रा
Mon, 20 Jul 2026 06:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्र प्रयाग
Updated Mon, 20 Jul 2026 06:29 PM IST
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मौसम खराब होने पर रोकी जा रही केदारनाथ यात्रा
पैदल मार्ग पर सीसीटीवी के जरिये संवेदनशील क्षेत्रों की जा रही निगरानी
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रप्रयाग/फाटा। केदारनाथ यात्रा की सुरक्षा को लेकर जिला आपदा परिचालन केंद्र की ओर से यात्रा मार्ग और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। वहीं मौसम खराब होने पर यात्रा रोकी जा रही है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि केदारनाथ यात्रा मौसम के अनुरूप संचालित हो रही है और मौसम सामान्य होने पर यात्रियों को आगे भेजा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आपदा नियंत्रण कक्ष से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पैदल मार्ग की लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं यात्रा मार्ग पर तैनात एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, आपदा मित्रों और अन्य बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। यदि मौसम अचानक खराब होता है या यात्रा मार्ग पर खतरा बढ़ता है तो एहतियातन यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया जाएगा। उन्होंने बताया कि यात्रा मार्ग पर लगातार लाउडस्पीकर और अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से यात्रियों को मौसम की स्थिति और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
बारिश से तीन जगह बंद रहे बदरी-केदार हाईवे
रुद्रप्रयाग। लगातार बारिश के कारण सोमवार सुबह जिले में बदरीनाथ और केदारनाथ हाईवे तीन स्थानों पर मलबा आने से बंद रहे। सिरोहबगड़ में बदरीनाथ हाईवे पर मलबा आने से करीब दो घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान डंपिंग जोन के पास एक ओवरलोड ट्रक मलबे में फंस गया जिसे एनएच की जेसीबी की मदद से बाहर निकाला गया। मार्ग सुचारु कराने के लिए आरवीएनएल, खांकरा से भी अतिरिक्त मशीन मंगाई गईं। वहीं केदारनाथ हाईवे बांसवाड़ा के पास सुबह करीब 6:10 बजे मलबा आने से बंद हो गया। सूचना मिलते ही एनएच की टीम जेसीबी के साथ मौके पर पहुंची और मलबा हटाकर मार्ग खोला गया। इसके अलावा सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच शटल पार्किंग भी प्रभावित रही। वहीं एनएच के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडे ने बताया कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जेसीबी तैनात हैं ताकि मार्ग बंद होने पर कम समय में आवाजाही बहाल की जा सके। संवाद
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बारिश से बड़ा नदियों का जलस्तर, शिव प्रतिमा डूबी
मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने पर बैराज के सभी गेट खोले
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रप्रयाग। जिले में लगातार हो रही बारिश से मंदाकिनी और अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। हालांकि अलकनंदा चेतावनी स्तर से नीचे बह रही है। मुख्यालय स्थित अलकनंदा तट पर स्थापित भगवान शिव की प्रतिमा (पांच फीट तक) भी पानी में डूब गई। हालांकि जिला आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार सभी नदियों का जलस्तर अभी चेतावनी स्तर से नीचे बह रहा है। इसके बावजूद प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। सोमवार को अलकनंदा नदी का जलस्तर 625 मीटर रहा जबकि चेतावनी स्तर 626 मीटर है। मंदाकिनी का जलस्तर 624.15 मीटर दर्ज किया गया जो 625 मीटर के चेतावनी स्तर से नीचे है। वहीं गंगानगर में 799.90 मीटर और गौरीकुंड में 1974.12 मीटर जलस्तर रिकॉर्ड किया गया। वहीं मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने और सिल्ट जमा होने से कुंड स्थित सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना से दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक बैराज के सभी गेट खोल दिए गए। इस कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ गया। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से नदी क्षेत्र से दूर रहने की अपील की।
जखोली-बसुकेदार मार्ग कई स्थानों पर बंद
बसुकेदार। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जखोली-बसुकेदार मार्ग तालजामन, पाटियो, किमाणा और खाटली सहित कई स्थानों पर मलबा आने से बंद हो गया। मार्ग बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों की आवाजाही ठप हो गई। लोग सुबह करीब पांच बजे से लोनिवि की मशीनों का इंतजार करते रहे।
पूर्व प्रधान मोहन सिंह भंडारी, पूर्व प्रधान रजनी नेगी और समाजसेवी जयेंद्र पंवार ने कहा कि बीते वर्ष की आपदा के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों और संवेदनशील स्थलों पर स्थायी सुरक्षा कार्य नहीं होने से हर बारिश में यही स्थिति बन रही है। कई स्थानों पर सड़कें इतनी क्षतिग्रस्त हैं कि पैदल आवाजाही भी जोखिम भरी हो गई है। वहीं लोनिवि के अधिशासी अभियंता राकेश प्रकाश नैथानी ने बताया कि जिले में कई मार्ग एक साथ बंद होने के कारण मशीनों को सभी स्थानों तक पहुंचने में समय लग रहा है। क्षेत्र में दो जेसीबी लगातार कार्य कर रही हैं लेकिन लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते कुछ स्थानों पर काम करना भी जोखिम भरा है।
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पैदल मार्ग पर सीसीटीवी के जरिये संवेदनशील क्षेत्रों की जा रही निगरानी
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रप्रयाग/फाटा। केदारनाथ यात्रा की सुरक्षा को लेकर जिला आपदा परिचालन केंद्र की ओर से यात्रा मार्ग और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। वहीं मौसम खराब होने पर यात्रा रोकी जा रही है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि केदारनाथ यात्रा मौसम के अनुरूप संचालित हो रही है और मौसम सामान्य होने पर यात्रियों को आगे भेजा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आपदा नियंत्रण कक्ष से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पैदल मार्ग की लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं यात्रा मार्ग पर तैनात एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, आपदा मित्रों और अन्य बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। यदि मौसम अचानक खराब होता है या यात्रा मार्ग पर खतरा बढ़ता है तो एहतियातन यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया जाएगा। उन्होंने बताया कि यात्रा मार्ग पर लगातार लाउडस्पीकर और अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से यात्रियों को मौसम की स्थिति और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
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बारिश से तीन जगह बंद रहे बदरी-केदार हाईवे
रुद्रप्रयाग। लगातार बारिश के कारण सोमवार सुबह जिले में बदरीनाथ और केदारनाथ हाईवे तीन स्थानों पर मलबा आने से बंद रहे। सिरोहबगड़ में बदरीनाथ हाईवे पर मलबा आने से करीब दो घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान डंपिंग जोन के पास एक ओवरलोड ट्रक मलबे में फंस गया जिसे एनएच की जेसीबी की मदद से बाहर निकाला गया। मार्ग सुचारु कराने के लिए आरवीएनएल, खांकरा से भी अतिरिक्त मशीन मंगाई गईं। वहीं केदारनाथ हाईवे बांसवाड़ा के पास सुबह करीब 6:10 बजे मलबा आने से बंद हो गया। सूचना मिलते ही एनएच की टीम जेसीबी के साथ मौके पर पहुंची और मलबा हटाकर मार्ग खोला गया। इसके अलावा सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच शटल पार्किंग भी प्रभावित रही। वहीं एनएच के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडे ने बताया कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जेसीबी तैनात हैं ताकि मार्ग बंद होने पर कम समय में आवाजाही बहाल की जा सके। संवाद
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बारिश से बड़ा नदियों का जलस्तर, शिव प्रतिमा डूबी
मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने पर बैराज के सभी गेट खोले
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रप्रयाग। जिले में लगातार हो रही बारिश से मंदाकिनी और अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। हालांकि अलकनंदा चेतावनी स्तर से नीचे बह रही है। मुख्यालय स्थित अलकनंदा तट पर स्थापित भगवान शिव की प्रतिमा (पांच फीट तक) भी पानी में डूब गई। हालांकि जिला आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार सभी नदियों का जलस्तर अभी चेतावनी स्तर से नीचे बह रहा है। इसके बावजूद प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। सोमवार को अलकनंदा नदी का जलस्तर 625 मीटर रहा जबकि चेतावनी स्तर 626 मीटर है। मंदाकिनी का जलस्तर 624.15 मीटर दर्ज किया गया जो 625 मीटर के चेतावनी स्तर से नीचे है। वहीं गंगानगर में 799.90 मीटर और गौरीकुंड में 1974.12 मीटर जलस्तर रिकॉर्ड किया गया। वहीं मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने और सिल्ट जमा होने से कुंड स्थित सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना से दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक बैराज के सभी गेट खोल दिए गए। इस कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ गया। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से नदी क्षेत्र से दूर रहने की अपील की।
जखोली-बसुकेदार मार्ग कई स्थानों पर बंद
बसुकेदार। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जखोली-बसुकेदार मार्ग तालजामन, पाटियो, किमाणा और खाटली सहित कई स्थानों पर मलबा आने से बंद हो गया। मार्ग बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों की आवाजाही ठप हो गई। लोग सुबह करीब पांच बजे से लोनिवि की मशीनों का इंतजार करते रहे।
पूर्व प्रधान मोहन सिंह भंडारी, पूर्व प्रधान रजनी नेगी और समाजसेवी जयेंद्र पंवार ने कहा कि बीते वर्ष की आपदा के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों और संवेदनशील स्थलों पर स्थायी सुरक्षा कार्य नहीं होने से हर बारिश में यही स्थिति बन रही है। कई स्थानों पर सड़कें इतनी क्षतिग्रस्त हैं कि पैदल आवाजाही भी जोखिम भरी हो गई है। वहीं लोनिवि के अधिशासी अभियंता राकेश प्रकाश नैथानी ने बताया कि जिले में कई मार्ग एक साथ बंद होने के कारण मशीनों को सभी स्थानों तक पहुंचने में समय लग रहा है। क्षेत्र में दो जेसीबी लगातार कार्य कर रही हैं लेकिन लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते कुछ स्थानों पर काम करना भी जोखिम भरा है।