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केदारनाथ विस में खिला कमल, शैलारानी को भी मिली संजीवनी
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केदारनाथ विधानसभा में भाजपा की 10 साल बाद वापसी हुई है। भाजपा की शैलारानी रावत को पोस्टल बैलेट के साथ ही ईवीएम में निर्दलीय व कांग्रेस की अपेक्षा काफी अधिक वोट मिले हैं। यहां कमल खिलने के साथ ही विधायक चुनी गई शैलारानी रावत को भी संजीवनी मिली है। मोदी मैजिक और कार्यकर्ताओं की मेहनत सभी बूथों पर नजर आई, जिसका परिणाम जीत के रूप में आया है।
केदारनाथ विधानसभा में वर्ष 2022 का विस चुनाव भाजपा के लिए यहां कई मायनों में विशेष था। एक तरफ जहां दस वर्ष का सूखा खत्म करने के साथ ही खोए वोट बैंक को फिर से अर्जित करने की चुनौती भी थी। यही नहीं पार्टी प्रत्याशी शैलारानी रावत को भी पार्टी हाईकमान के विश्वास पर खरा उतरना था, क्योंकि 2017 में वह चुनाव हारने के साथ ही चौथे नंबर पर रहीं थी। इन सभी मुश्किलों से पार पाते हुए भाजपा ने केदारनाथ विधानसभा में अपने खोए जनाधार को प्राप्त करते हुए अच्छे अंतर से जीत दर्ज की है। यह जीत दूसरी बार विधायक चुनी गई शैलारानी रावत के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी प्रत्याशी के प्रचार में अगस्त्यमुनि पहुंचे थे।
वर्ष 2002 में हुए पहले विस चुनाव में शैलारानी रावत कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं, लेकिन तब उन्हें भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल से हार झेलनी पड़ी। लेकिन 2012 में कांग्रेस से पुन: टिकट मिलने पर वह पहली बार केदारनाथ विस से विधायक चुनी गई। अक्तूबर 2016 में हरीश रावत सरकार से बगावत करने के बाद शैलारानी रावत ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। अब, वह भाजपा से केदारनाथ की विधायक चुनी गई हैं, जिससे स्वयं के साथ पार्टी को नया आयाम मिला है।
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केदारनाथ विधानसभा में वर्ष 2022 का विस चुनाव भाजपा के लिए यहां कई मायनों में विशेष था। एक तरफ जहां दस वर्ष का सूखा खत्म करने के साथ ही खोए वोट बैंक को फिर से अर्जित करने की चुनौती भी थी। यही नहीं पार्टी प्रत्याशी शैलारानी रावत को भी पार्टी हाईकमान के विश्वास पर खरा उतरना था, क्योंकि 2017 में वह चुनाव हारने के साथ ही चौथे नंबर पर रहीं थी। इन सभी मुश्किलों से पार पाते हुए भाजपा ने केदारनाथ विधानसभा में अपने खोए जनाधार को प्राप्त करते हुए अच्छे अंतर से जीत दर्ज की है। यह जीत दूसरी बार विधायक चुनी गई शैलारानी रावत के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी प्रत्याशी के प्रचार में अगस्त्यमुनि पहुंचे थे।
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वर्ष 2002 में हुए पहले विस चुनाव में शैलारानी रावत कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं, लेकिन तब उन्हें भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल से हार झेलनी पड़ी। लेकिन 2012 में कांग्रेस से पुन: टिकट मिलने पर वह पहली बार केदारनाथ विस से विधायक चुनी गई। अक्तूबर 2016 में हरीश रावत सरकार से बगावत करने के बाद शैलारानी रावत ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। अब, वह भाजपा से केदारनाथ की विधायक चुनी गई हैं, जिससे स्वयं के साथ पार्टी को नया आयाम मिला है।
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