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28 दिन में 26 मवेशियों का शिकार कर चुका गुलदार
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Sun, 29 Jan 2017 09:17 PM IST
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गुलदार
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बसुकेदार तहसील क्षेत्र में गुलदार ने 28 माह में 26 मवेशियों को मार दिया है। जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने वन विभाग से गुलदार को पकड़ने और पीड़ित पशुपालकों को मुआवजे की मांग की है।
क्यार्क, बरसूड़ी, कौशलपुर, नौंणी, पौंडार आदि गांवों में पिछले एक माह से सुबह से लेकर रात तक गुलदार घात लगाए बैठा है। यहां, दोपहर को ही गुलदार घरों के निकट पहुंच रहा है। स्थानीय भानु प्रकाश भट्ट, लक्ष्मण बिष्ट, संदीप चौहान, डीएस रावत, दरम्यान सिंह पंवार आदि ने बताया कि इस संबंध में विभाग को मौखिक व लिखित में अवगत कराकर पिंजरा लगाने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
क्यार्क की ग्राम प्रधान हर्षिला देवी ने बताया कि स्कूली बच्चों से लेकर घरों में रहने वाले नौनिहालों व बुजुर्गों के साथ खेतों व जंगलों में घास-लकड़ी के लिए जाने वाली महिलाओं के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने के साथ गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने व पशुपालकों को मुआवजा देने की मांग की है।
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इधर, रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ राजीव धीमान ने बताया कि प्राथमिकता गुलदार को क्षेत्र से गश्त कराकर भगाने की हो रही है। अगर, जरूरी हुआ तो मुख्य वन संरक्षक से अनुमति लेकर पिंजरा लगाया जाएगा। प्रभावित काश्तकारों को विभागीय स्तर पर मदद दी जाएगी।
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क्यार्क, बरसूड़ी, कौशलपुर, नौंणी, पौंडार आदि गांवों में पिछले एक माह से सुबह से लेकर रात तक गुलदार घात लगाए बैठा है। यहां, दोपहर को ही गुलदार घरों के निकट पहुंच रहा है। स्थानीय भानु प्रकाश भट्ट, लक्ष्मण बिष्ट, संदीप चौहान, डीएस रावत, दरम्यान सिंह पंवार आदि ने बताया कि इस संबंध में विभाग को मौखिक व लिखित में अवगत कराकर पिंजरा लगाने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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क्यार्क की ग्राम प्रधान हर्षिला देवी ने बताया कि स्कूली बच्चों से लेकर घरों में रहने वाले नौनिहालों व बुजुर्गों के साथ खेतों व जंगलों में घास-लकड़ी के लिए जाने वाली महिलाओं के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने के साथ गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने व पशुपालकों को मुआवजा देने की मांग की है।
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इधर, रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ राजीव धीमान ने बताया कि प्राथमिकता गुलदार को क्षेत्र से गश्त कराकर भगाने की हो रही है। अगर, जरूरी हुआ तो मुख्य वन संरक्षक से अनुमति लेकर पिंजरा लगाया जाएगा। प्रभावित काश्तकारों को विभागीय स्तर पर मदद दी जाएगी।