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गैंठाणा में नहीं बन पाई पांच सौ वर्ग मीटर झील
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जखोली ब्लॉक के बांगर के गैंठाणा में प्रस्तावित कृत्रिम झील धरातल पर नहीं उतर पाई है। 500 वर्ग मीटर में बनने वाली झील में आठ किमी क्षेत्र का बरसाती पानी जमा होना था, लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने झील को औचित्यहीन बताते हुए फाइल बंद कर दी।
राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्लूपी) के तहत पेयजल योजनाओं के निर्माण, जल संरक्षण (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) व स्रोत संवर्धन जैसे कार्यक्रमों के तहत वर्ष 2011-12 में जखोली के गैंठाणा में कृत्रिम झील निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके बाद जल निगम द्वारा झील निर्माण के लिए वर्ष 2015 में 460 लाख का प्रस्ताव उत्तराखंड सरकार को भेजा गया। दो वर्ष पूर्व उत्तराखंड शासन द्वारा जलनिगम से हटाकर गैंठाणा झील निर्माण की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को दी गई, जबकि विभाग के आला अधिकारियों ने झील को औचित्यहीन बताते हुए फाइल बंद कर दी है।
दो वर्ष पूर्व विभाग को गैंठाणा में झील निर्माण के लिए कहा गया था। तब, सर्वेक्षण सहित प्रारंभिक स्तर पर वित्तीय प्रस्ताव भी तैयार किया गया, लेकिन आला अधिकारियों ने झील को औचित्यहीन बताते हुए स्वीकृति से इंकार कर दिया था।
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- पीएस बिष्ट, ईई, सिंचाई खंड, रुद्रप्रयाग
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राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्लूपी) के तहत पेयजल योजनाओं के निर्माण, जल संरक्षण (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) व स्रोत संवर्धन जैसे कार्यक्रमों के तहत वर्ष 2011-12 में जखोली के गैंठाणा में कृत्रिम झील निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके बाद जल निगम द्वारा झील निर्माण के लिए वर्ष 2015 में 460 लाख का प्रस्ताव उत्तराखंड सरकार को भेजा गया। दो वर्ष पूर्व उत्तराखंड शासन द्वारा जलनिगम से हटाकर गैंठाणा झील निर्माण की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को दी गई, जबकि विभाग के आला अधिकारियों ने झील को औचित्यहीन बताते हुए फाइल बंद कर दी है।
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दो वर्ष पूर्व विभाग को गैंठाणा में झील निर्माण के लिए कहा गया था। तब, सर्वेक्षण सहित प्रारंभिक स्तर पर वित्तीय प्रस्ताव भी तैयार किया गया, लेकिन आला अधिकारियों ने झील को औचित्यहीन बताते हुए स्वीकृति से इंकार कर दिया था।
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- पीएस बिष्ट, ईई, सिंचाई खंड, रुद्रप्रयाग