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गौरीकुंड क्षेत्र में दूरबीन व ड्रोन से होगी पेड़ों की गणना
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सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे के लिए पेड़ों की गिनती करते हुए वन विभाग व कार्यदायी संस्था के वन भूमि ?
- फोटो : RUDRAPRYAG
सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे के लिए गौरीकुंड क्षेत्र में दूरबीन व ड्रोन की मदद से पेड़ों की गणना की जाएगी। अन्य स्थानों पर पेड़ों की गिनती का कार्य पूरा हो चुका है। अब केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग रिपोर्ट तैयार कर नोडल कार्यालय देहरादून को भेजेगा जहां से पेड़ों के आंकड़े जारी किए जाएंगे। इसके बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
केदारनाथ यात्रा को सरल बनाने के लिए सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे निर्माण के लिए सर्वेक्षण के बाद पेड़ों की गणना का कार्य भी लगभग पूरा होने वाला है। अब गौरीकुंड क्षेत्र रह गया है जहां विषम हालातों के चलते तकनीक की मदद से पेड़ों की गिनती होनी है। यह कार्य भी इस सप्ताह के अगले दो-तीन दिनों में पूरा हो जाएगा। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के ऊखीमठ रेंज के रेंजर पंकज ध्यानी ने बताया कि रोपवे निर्माण के लिए जहां-जहां टॉवर लगाए जाने और स्टेशन स्थापित होने हैं उस क्षेत्र में पेड़ों की गणना की गई है।
रोपवे निर्माण के लिए 11 हेक्टेयर भूमि अधिगृहित की गई है जिसमें अब सिर्फ पेड़ों की गणना के लिए गौरीकुंड वाला क्षेत्र रह गया है। यहां पूरे वन क्षेत्र में बरसाती स्रोतों की संख्या अधिक है जिससे पेड़ों की गणना करना मुश्किल है। वहां के हालातों को देखते हुए ड्रोन व दूरबीन से विशेषज्ञों की मदद से इस सप्ताह यहां पेड़-पौधों की गणना पूरी की जाएगी। इधर, रोपवे की कार्यदायी संस्था ट्रेवस्ट्रा के वन भूमि सलाहकार विनोद रांटा ने वन विभाग के नोडल अधिकारी से मंजूरी के बाद डीपीआर भी केंद्र को भेज दी जाएगी।
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केदारनाथ यात्रा को सरल बनाने के लिए सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे निर्माण के लिए सर्वेक्षण के बाद पेड़ों की गणना का कार्य भी लगभग पूरा होने वाला है। अब गौरीकुंड क्षेत्र रह गया है जहां विषम हालातों के चलते तकनीक की मदद से पेड़ों की गिनती होनी है। यह कार्य भी इस सप्ताह के अगले दो-तीन दिनों में पूरा हो जाएगा। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के ऊखीमठ रेंज के रेंजर पंकज ध्यानी ने बताया कि रोपवे निर्माण के लिए जहां-जहां टॉवर लगाए जाने और स्टेशन स्थापित होने हैं उस क्षेत्र में पेड़ों की गणना की गई है।
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रोपवे निर्माण के लिए 11 हेक्टेयर भूमि अधिगृहित की गई है जिसमें अब सिर्फ पेड़ों की गणना के लिए गौरीकुंड वाला क्षेत्र रह गया है। यहां पूरे वन क्षेत्र में बरसाती स्रोतों की संख्या अधिक है जिससे पेड़ों की गणना करना मुश्किल है। वहां के हालातों को देखते हुए ड्रोन व दूरबीन से विशेषज्ञों की मदद से इस सप्ताह यहां पेड़-पौधों की गणना पूरी की जाएगी। इधर, रोपवे की कार्यदायी संस्था ट्रेवस्ट्रा के वन भूमि सलाहकार विनोद रांटा ने वन विभाग के नोडल अधिकारी से मंजूरी के बाद डीपीआर भी केंद्र को भेज दी जाएगी।
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