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भाजपा जिलाध्यक्ष कांग्रेस में हुए शामिल

Sat, 28 Jan 2017 09:45 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Sat, 28 Jan 2017 09:45 PM IST
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नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि के एक दिन बाद ही भाजपा के जिलाध्यक्ष डा. आनंद सिंह बोहरा ने पार्टी से बगावत कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उनके इस निर्णय से जहां जिले की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। वहीं, डा. बोहरा के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

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विधानसभा चुनाव के तहत रुद्रप्रयाग सीट से संभावित दावेदारों में शामिल डा. बोहरा टिकट वितरण के बाद से नाराज थे। डॉ. चौधरी के पार्टी प्रत्याशी भरत सिंह चौधरी से पहले से ही वैचारिक व व्यवहारिक दूरी जगजाहिर है। ऐसे में बोहरा ने सीधे तौर पर चुप्पी साध ली थी। यहां तक कि बीते दस दिनों में बतौर जिलाध्यक्ष के नाते चुनाव को लेकर उन्होंने कोई बयान भी नहीं दिया। ऐसे में यह तय था कि डा. बोहरा और उनके समर्थक सीधे तौर पर प्रत्याशी के लिए प्रचार तो नहीं करेंगे।
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जिस तरह से उन्होंने पार्टी छोड़ी है, वह चौंकाने वाला निर्णय है। जानकारों की मानें तो, डा. बोहरा ने सूझबूझ के साथ राजनीति नहीं की। यदि वे टिकट वितरण से नाराज थे, तो पार्टी हाईकमान को अवगत कराते, या फिर कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रदीप थपलियाल की तर्ज पर बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरते। उन्होंने न तो नामांकन तिथि तक यह निर्णय लिया और न हाईकमान को अपनी नाराजगी से अवगत कराया। 31 अक्तूबर 2015 को जिलाध्यक्ष बने डा. बोहरा पर संगठन संचालन को लेकर कई बार चर्चाओं में भी रहे। युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष चुनाव हो चाहे, अन्य मामले, उनके निर्णय पर सवाल उठे हैं।
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बावजूद, उनकी छवि स्वच्छ नेता के तौर पर मानी गई, लेकिन जिस तरह से उन्होंने बिना कार्यकर्ताओं व समर्थकों से सलाह लिए बिना भाजपा को छोड़कर कांग्रेस को ज्वाइन किया है, उससे कई बातें निकलकर सामने आ रही हैं। दूसरी तरफ पूर्व केबिनेट मंत्री मातबर सिंह कंडारी की बीजेपी के प्रति वफादारी इस बार पुत्रमोह में दगा दे गई। वे पूर्व में भी पार्टी को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे और लोस चुनाव के दौरान दोबारा बीजेपी में लौट आए थे।

कंडारी, अगर समय-समय पर इस तरह का खेल नहीं खेलते तो आज टिकट की दावेदारी में पहले स्थान पर होने के साथ प्रदेश कार्यकारिणी का हिस्सा भी बने रहते।

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