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तीर्थ पुरोहित पुराने स्थान पर पुनर्निर्माण पर अडे़
Rudraprayag
Updated Thu, 09 Oct 2014 05:33 AM IST
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गुप्तकाशी। केदारपुरी पुनर्निर्माण के लिए अधिकारियों और तीर्थ पुरोहितों के बीच पहला सीधा संवाद हुआ। अधिकारियों ने पुरोहितों के समक्ष पुनर्निर्माण का प्रारंभिक खाका रखते हुए सुझाव लिए। तीर्थ पुरोहित धाम में सुरक्षित खडे़ भवनों को न तोड़ने और पुराने स्थान पर केदारपुरी बसाने की मांग पर अडिग रहे। ऐसे में अधिकारी अपने साथ केदारपुरी पुनर्निर्माण का नक्शा और प्लान बिना दिखाए लौट गए।
बुधवार को अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, आपदा प्रबंधन सचिव भास्करानंद और मुख्यमंत्री के सचिव अमित नेगी हेलीकाप्टर से गुप्तकाशी पहुंचे। जीआईसी गुप्तकाशी के मैदान में विधायक शैला रानी रावत और डीएम डा. राघव लंगर की मौजूदगी में उनकी तीर्थ पुरोहितों के साथ बैठक हुई। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव शर्मा ने बताया कि बैठक में सिर्फ रूपरेखा रखी जा रही है। हक-हकूकधारियों के साथ चर्चा कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जीएसआई (जियोग्राफिकल सर्वे आफ इंडिया) और वाडिया इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट को आधार बनाया जा रहा है। तीन माह प्लानिंग फेज के हैं। शीतकाल में धाम में निर्माण सामग्री और जरूरी संसाधनों को स्टोर किया जाएगा, ताकि अप्रैल से काम शुरू हो सके।
केदारसभा के अध्यक्ष शंकर प्रसाद बगवाड़ी ने कहा कि सरकार पुनर्निर्माण का ब्लू प्रिंट सावर्जनिक करे। केदारसभा के महामंत्री केशव तिवाड़ी ने कहा कि मुआवजा संबंधी कमियां दूर की जाए। तीर्थ पुरोहितों को अहेतुक राशि तक नहीं मिली। विधायक शैला रानी रावत ने कहा कि तीर्थ पुरोहितों को पूरी मदद मिलनी चाहिए। आपदा में कई पुराने घर टूट गए।
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बांके लाल बगवाड़ी ने कहा कि केदारनाथ तक सड़क बननी चाहिए। पुनर्निर्माण कार्य तीर्थ पुरोहितों को स्वयं करने दीजिए। केदारसभा के पूर्व अध्यक्ष भगवती प्रसाद तिवारी ने बताया कि पुनर्निर्माण मुद्दे पर तीर्थ पुरोहित सरकार को एक ईंच जमीन नहीं देंगे। तीर्थ पुरोहितों को पुरानी केदारपुरी में ही बसाया जाए। लक्ष्मी प्रसाद जुगदाण ने कहा कि धाम में सुरक्षा दीवार का निर्माण 2003 में ही हो जाना चाहिए था। तब चौराबाड़ी ग्लेशियर के खतरे से आगाह किया गया था। एसीएस ने कहा कि सरकार कोई ऐसे भवन नहीं छेड़ेगी, जो सुरक्षित हैं। बिना तीर्थ पुरोहितों को विश्वास में लिए कोई काम नहीं होगा। तीर्थ पुरोहित इसके लिए परामर्श समिति बना ले। उन्होंने बताया कि अक्तूबर माह से केदारनाथ पैदल मार्ग अंडरग्राउंड विद्युत लाइन बिछाने का काम शुरू हो जाएगा। अप्रैल 2015 से लिनचोली से केदारनाथ रोपवे का निर्माण भी शुरू हो जाएगा।
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बुधवार को अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, आपदा प्रबंधन सचिव भास्करानंद और मुख्यमंत्री के सचिव अमित नेगी हेलीकाप्टर से गुप्तकाशी पहुंचे। जीआईसी गुप्तकाशी के मैदान में विधायक शैला रानी रावत और डीएम डा. राघव लंगर की मौजूदगी में उनकी तीर्थ पुरोहितों के साथ बैठक हुई। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव शर्मा ने बताया कि बैठक में सिर्फ रूपरेखा रखी जा रही है। हक-हकूकधारियों के साथ चर्चा कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जीएसआई (जियोग्राफिकल सर्वे आफ इंडिया) और वाडिया इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट को आधार बनाया जा रहा है। तीन माह प्लानिंग फेज के हैं। शीतकाल में धाम में निर्माण सामग्री और जरूरी संसाधनों को स्टोर किया जाएगा, ताकि अप्रैल से काम शुरू हो सके।
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केदारसभा के अध्यक्ष शंकर प्रसाद बगवाड़ी ने कहा कि सरकार पुनर्निर्माण का ब्लू प्रिंट सावर्जनिक करे। केदारसभा के महामंत्री केशव तिवाड़ी ने कहा कि मुआवजा संबंधी कमियां दूर की जाए। तीर्थ पुरोहितों को अहेतुक राशि तक नहीं मिली। विधायक शैला रानी रावत ने कहा कि तीर्थ पुरोहितों को पूरी मदद मिलनी चाहिए। आपदा में कई पुराने घर टूट गए।
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बांके लाल बगवाड़ी ने कहा कि केदारनाथ तक सड़क बननी चाहिए। पुनर्निर्माण कार्य तीर्थ पुरोहितों को स्वयं करने दीजिए। केदारसभा के पूर्व अध्यक्ष भगवती प्रसाद तिवारी ने बताया कि पुनर्निर्माण मुद्दे पर तीर्थ पुरोहित सरकार को एक ईंच जमीन नहीं देंगे। तीर्थ पुरोहितों को पुरानी केदारपुरी में ही बसाया जाए। लक्ष्मी प्रसाद जुगदाण ने कहा कि धाम में सुरक्षा दीवार का निर्माण 2003 में ही हो जाना चाहिए था। तब चौराबाड़ी ग्लेशियर के खतरे से आगाह किया गया था। एसीएस ने कहा कि सरकार कोई ऐसे भवन नहीं छेड़ेगी, जो सुरक्षित हैं। बिना तीर्थ पुरोहितों को विश्वास में लिए कोई काम नहीं होगा। तीर्थ पुरोहित इसके लिए परामर्श समिति बना ले। उन्होंने बताया कि अक्तूबर माह से केदारनाथ पैदल मार्ग अंडरग्राउंड विद्युत लाइन बिछाने का काम शुरू हो जाएगा। अप्रैल 2015 से लिनचोली से केदारनाथ रोपवे का निर्माण भी शुरू हो जाएगा।